
बाकू/तेल अवीव: आर्मेनियाई कंपनी Davaro द्वारा हाल ही में पेश किया गया Dragonfly-3 ड्रोन इजरायल और अजरबैजान के बीच विवाद का कारण बन गया है। अजरबैजान का आरोप है कि यह ड्रोन इजरायली Harop ड्रोन से मिलता-जुलता है और इसकी टेक्नोलॉजी भारत के जरिए आर्मेनिया को दी गई है। भारत की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अजरबैजान Dragonfly-3 को लेकर नाराज है। उनका कहना है कि यह एक स्ट्रैटेजिक ड्रोन है, जो अजरबैजान की सुरक्षा के लिए सीधे खतरा पैदा कर सकता है। ग्लोब्स में छपी रिपोर्ट में डिफेंस इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि आर्मेनिया के Dragonfly-3 ड्रोन की टेक्नोलॉजी भारत से पहुंची और इसे ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत विकसित किया गया।
हारोप ड्रोन की विशेषता
Harop ड्रोन को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है और इसे 2020 के नागोर्नो-काराबाख युद्ध में अजरबैजान ने इस्तेमाल किया था। यह सिर्फ ड्रोन नहीं, बल्कि सुसाइड ड्रोन और मिसाइल का संयोजन है। इसकी खासियत यह है कि यह 9 घंटे तक हवा में मंडराकर टारगेट पर नजर रखता है और सही समय पर हमला करता है। इसका वज़न लगभग 23 किलो विस्फोटक है और ऑपरेशनल रेंज 1000 किलोमीटर से अधिक है।
अजरबैजान की आपत्ति
अजरबैजान के मिलिट्री सोर्स का कहना है कि आर्मेनिया के पास ऐसे स्ट्रैटेजिक साधन होने से सुरक्षा में सीधा खतरा है। येरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया कि अजरबैजान दुनिया के कुछ सबसे एडवांस्ड इजरायली डिफेंस सिस्टम चला रहा है और इस टेक्नोलॉजी फैलाव को गंभीरता से ले रहा है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
यॉर्कटाउन इंस्टीट्यूट के रिसर्च फेलो जोसेफ एपस्टीन ने कहा कि अगर भारत ने आर्मेनिया को यह तकनीक दी है, तो यह इजरायल का जानबूझकर कदम नहीं माना जाना चाहिए। तकनीकी ट्रांसफर से दोनों पक्षों को सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि आर्मेनिया और पाकिस्तान/तेहरान के अच्छे संबंध हैं।
भारत की भूमिका और प्रतिक्रिया
भारत फिलहाल इस विवाद पर चुप्पी साधे हुए है। भारत के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत विकसित तकनीक को लेकर अजरबैजान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस मसले पर संतुलित और रणनीतिक रुख अपनाना होगा।
