
ढाका: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की बड़ी जीत के बाद तारिक रहमान देश की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। दो दशक बाद सत्ता में BNP की वापसी न सिर्फ बांग्लादेश के लिए बल्कि भारत के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है।
संतुलित और सकारात्मक रुख
17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में कहा था कि उनके पास एक स्पष्ट योजना है। डेढ़ साल से अस्थिरता और गंभीर सुरक्षा संकट झेल रहे बांग्लादेश के लिए यह योजना बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।
उन्होंने अपने भाषण में दो बातें प्रमुख रूप से रखीं:
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धर्म व्यक्तिगत विषय है और वे एक ऐसा सुरक्षित और समावेशी बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जो सभी का हो।
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बांग्लादेश के हित उनकी प्राथमिकता होंगे।
तारिक का रुख अंतरिम सरकार की तुलना में ज्यादा सुलझा और सकारात्मक माना जा रहा है। उनके संतुलित दृष्टिकोण से भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा नहीं मिला, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने का संदेश गया।
भारत के साथ रिश्तों में अवसर
BNP की जीत पर सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी। पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को याद दिलाते हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का संदेश दिया।
भारत और बांग्लादेश के साझा हित कई क्षेत्रों में जुड़े हुए हैं। BNP की बड़ी जीत यह दर्शाती है कि आम बांग्लादेशी जनता ने कट्टरपंथी विचारधारा वाले जमात-ए-इस्लामी पर भरोसा नहीं किया। ऐसे में यह समय है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए कदम बढ़ाने की जरूरत है।
जनादेश का सम्मान
भारत की नीति हमेशा रही है कि वह दूसरे देशों की संप्रभुता और वहां के जनादेश का सम्मान करे। पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट है कि भारत BNP के नेतृत्व में रिश्तों को मजबूती देने के लिए तैयार है। BNP ने भी अपने रुख में संबंधों को सुधारने और मजबूत बनाने की बात कही है।
इस प्रकार, BNP की जीत न केवल बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता की ओर संकेत है बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए भी सकारात्मक अवसर प्रस्तुत करती है
