
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने किशोरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस योजना पर विचार शुरू कर दिया है। स्कूल और कॉलेज के छात्र अक्सर बाइक से आवागमन करते दिखते हैं, लेकिन 18 साल से कम आयु वालों को वर्तमान में लाइसेंस नहीं मिलता। इस कारण किशोर वाहन तो चलाते हैं, लेकिन ट्रैफिक नियमों की जानकारी न होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
क्या है योजना?
योजना के तहत हल्के दोपहिया वाहनों के लिए न्यूनतम उम्र सीमा को घटाकर 16 साल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए यूपी सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। यदि केंद्र से अनुमति मिलती है, तो जल्द ही इस संबंध में कार्यवाही शुरू की जाएगी।
मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने शुक्रवार को यूपी विधानसभा में बताया कि प्रस्ताव पर विचार चल रहा है और ड्राइविंग टेस्ट के नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। लर्निंग लाइसेंस लेने के बाद ही किशोर वाहन चला पाएंगे।
सड़क सुरक्षा पर जोर
मंत्री ने बताया कि अवैध कट और असुरक्षित सड़क मार्गों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए “मृत्यु दर शून्य कार्यक्रम” लागू किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में अभियान चलाकर सड़क सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
नई नियुक्तियाँ और वाहन जांच
परिवहन विभाग में नई नियुक्तियों की जानकारी भी दी गई। 36 नए एआरटीओ पद और 351 सहायक मोटर यान निरीक्षक के पद बनाए गए हैं। इन अधिकारियों को लखनऊ, गोरखपुर समेत 36 जिलों में तैनात किया जाएगा। उनका कार्य वाहन निरीक्षण और असुरक्षित वाहनों को सड़क से हटाना होगा।
इस कदम से किशोरों को कानूनी रूप से वाहन चलाने का अवसर मिलेगा और सड़क सुरक्षा भी बढ़ेगी।
