
नई दिल्ली: घर के किचन वेस्ट को फेंकने के बजाय उसे बेहतरीन जैविक खाद में बदलना अब आसान हो गया है। गार्डनिंग एक्सपर्ट कैलाश वाटी ने मटके के जरिए किचन के छिलकों से प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर ‘काला सोना’ बनाने का तरीका साझा किया है।
प्राकृतिक, सस्ता और बिना बदबू वाला तरीका
कैलाश वाटी के अनुसार, इस तरीके में सूखे पत्ते, मिट्टी और किचन वेस्ट का सही संतुलन बिठाया जाता है। इससे खाद बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है, बदबू नहीं आती और पौधों के लिए लाभकारी तत्व बने रहते हैं।
मटके की तैयारी और एयर-वेंटिलेशन
खाद बनाने के लिए एक मीडियम या बड़े मिट्टी के मटके का इस्तेमाल करें। मटके के चारों तरफ छोटे-छोटे छेद कर दें, ताकि हवा का संचार हो और कचरा सही तरीके से डीकंपोज हो।
लेयरिंग तकनीक:
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मटके के निचले हिस्से में सूखे पत्तों की मोटी परत बिछाएं।
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इसके ऊपर 1-2 इंच मिट्टी डालें।
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फिर किचन वेस्ट के छिलके की परत डालें।
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दोबारा मिट्टी और किचन वेस्ट की परत डालते रहें, जब तक मटका भर न जाए।
(नोट: कचरे के टुकड़े छोटे होने चाहिए, ताकि खाद जल्दी बने।)
गुड़ और लस्सी का मिश्रण:
2 गिलास छाछ में 200 ग्राम गुड़ मिलाकर तैयार मिश्रण धीरे-धीरे मटके में डालें। यह नमी बनाए रखता है और लाभकारी बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है।
क्या डालें और क्या न डालें:
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केवल कच्चे फलों और सब्जियों के छिलके डालें।
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पकी हुई चीजें, जैसे दाल, चावल, पकी सब्जी, तेल या दूध से बनी चीजें मटके में न डालें, इससे कीड़े लग सकते हैं और बदबू आ सकती है।
3 महीने में तैयार होगा ‘काला सोना’
मटके को ढक्कन या बोरी से ढककर छायादार जगह पर रखें। हर 15-20 दिन में ऊपर की मिट्टी हल्की हिला दें। लगभग 3 महीने में यह किचन वेस्ट गहरे भूरे या काले रंग के पाउडर में बदल जाएगा। इसे छानकर आप अपने पौधों में उपयोग कर सकते हैं।
इस आसान और प्रभावशाली तरीका से अब किचन कचरा फालतू नहीं जाएगा, बल्कि आपके बगीचे के लिए वरदान साबित होगा।
