
नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम के लिए बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूब ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एक्सेम्पशन एक्ट’ (EXILE Act) पेश किया है। अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो 2027 के वित्तीय वर्ष से H-1B वीजा प्रोग्राम खत्म हो सकता है।
बिल के पीछे कारण:
सांसद ग्रेग स्ट्यूब का कहना है कि H-1B वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नागरिकों की जगह विदेशी वर्कर्स को प्राथमिकता देता है, जिससे अमेरिकी युवा और वर्कर्स अवसरों से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम अपने वर्कर्स और बच्चों के अमेरिकन ड्रीम को सुरक्षित रखना चाहते हैं, इसलिए विदेशियों को प्राथमिकता देने वाले इस प्रोग्राम को खत्म करना जरूरी है।”
EXILE एक्ट का असर:
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एक्ट इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 214(g)(1)(A) में बदलाव करेगा।
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H-1B वीजा कैप खत्म होने के बाद कंपनियां इस वीजा के जरिए विदेशी वर्कर्स को जॉब नहीं दे पाएंगी।
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इसका मतलब है कि अमेरिकी टेक, हेल्थकेयर, फाइनेंस और अन्य सेक्टर में विदेशी वर्कर्स के लिए दरवाजे बंद हो जाएंगे।
डेटा और प्रभाव:
अमेरिकी सांसद के मुताबिक, H-1B वीजा का लगभग 80 प्रतिशत लाभ भारत और चीन के नागरिकों को मिला है, जिनमें अधिकांश आईटी और टेक सेक्टर में काम कर रहे हैं। वहीं, कई अमेरिकी डॉक्टर्स और युवा इस कारण अपने अवसर खो रहे हैं। उदाहरण के लिए, 10,000 अमेरिकी डॉक्टर्स रेजिडेंसी प्रोग्राम का हिस्सा नहीं बन पा रहे क्योंकि उनकी जगह 5,000 विदेशी डॉक्टर्स ने H-1B वीजा पर काम कर लिया है।
विशेषज्ञों की राय:
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर EXILE एक्ट लागू हो जाता है, तो अमेरिकी टेक कंपनियों को योग्य और अनुभवी विदेशी वर्कर्स की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि भारतीय और चीनी टेक पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने के अवसर लगभग समाप्त हो जाएंगे।
