
छपरा। बिहार के सारण जिले के छपरा में प्रेम संबंधों के चलते पिता की नृशंस हत्या करने के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। छपरा सिविल कोर्ट ने आरोपी बेटी अनीता कुमारी और उसके प्रेमी रामबाबू कुमार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला जून 2025 में सामने आया था, जिसने पूरे सारण जिले को दहला दिया था। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली इस घटना में बेटी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही पिता की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी।
आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ने पर बन गया पिता ‘दुश्मन’
पुलिस जांच और अदालत में सामने आए तथ्यों के अनुसार, मृतक ने अपनी बेटी को पड़ोस में रहने वाले युवक रामबाबू कुमार के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया था। इसके बाद वह दोनों के रिश्ते का विरोध करने लगे। यही विरोध धीरे-धीरे पिता के लिए मौत का कारण बन गया।
बताया गया कि पिता द्वारा बार-बार टोके जाने से नाराज बेटी और उसके प्रेमी ने मिलकर उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची।
रात डेढ़ बजे घर में घुसकर किया हमला
घटना की भयावहता का अंदाजा मृतक के बेटे और सूचक विकास कुमार के बयान से लगाया जा सकता है। विकास ने बताया कि 7 जून 2025 की रात करीब डेढ़ बजे पिता के चिल्लाने की आवाज सुनकर जब वह कमरे के पास पहुंचा, तो देखा कि उसकी बहन अनीता कुमारी पिता का हाथ पकड़कर दबोचे हुए थी और रामबाबू कुमार धारदार हथियार से लगातार वार कर रहा था।
विकास के अनुसार, बहन यह कहते हुए आरोपी को उकसा रही थी कि—
“हम लोगों को गलत काम करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया है, इसको जिंदा नहीं छोड़ना है।”
हमले में पिता खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। जब विकास बचाने गया तो उस पर भी हमला किया गया। शोर सुनकर मां और छोटी बहन बचाने आईं, तो उन पर भी वार किया गया।
स्पीडी ट्रायल में 8 महीने में सुनवाई पूरी
इस जघन्य हत्याकांड को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई कराई। महज 8 महीने में सुनवाई पूरी कर कोर्ट ने फैसला सुना दिया।
छपरा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग ने अमनौर थाना कांड संख्या 172/25 के सत्र वाद संख्या 1049/25 में दोनों आरोपियों को बीएनएस की धारा 103(1) के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जुर्माना नहीं देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड जमा नहीं करते, तो उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
फांसी की मांग हुई, कोर्ट ने उम्रकैद दी
सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने इस अपराध को “घिनौना और समाज पर बुरा प्रभाव डालने वाला” बताते हुए दोनों आरोपियों के लिए फांसी की मांग की थी। हालांकि अदालत ने परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर फांसी की जगह आजीवन कारावास का निर्णय सुनाया।
पुलिस जांच में खुली पूरी साजिश
पुलिस जांच के दौरान यह साफ हो गया था कि हत्या किसी अचानक विवाद में नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। पिता द्वारा प्रेम संबंधों का विरोध किए जाने से नाराज बेटी और प्रेमी ने मिलकर हत्या को अंजाम दिया।
घटना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए, जबकि बचाव पक्ष की दलीलें अदालत को संतुष्ट नहीं कर सकीं।
फैसले के बाद इलाके में चर्चा, लोगों ने कहा—‘करनी का फल मिला’
कोर्ट के फैसले के बाद इलाके में यह मामला फिर चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय लोगों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि यह फैसला समाज के लिए एक संदेश है कि अपराध कितना भी बड़ा हो, कानून से बचा नहीं जा सकता।
यह मामला न केवल रिश्तों की मर्यादा तोड़ने वाला है, बल्कि समाज को झकझोर देने वाली चेतावनी भी है कि गलत रास्ते पर चलकर कोई भी इंसान इंसानियत की सारी सीमाएं पार कर सकता है।
