
राजसमंद। देशभर में ज्वेलरी शोरूम और गोल्ड कारोबारियों को निशाना बनाकर करोड़ों की लूट को अंजाम देने वाला कुख्यात मास्टरमाइंड सुबोध सिंह उर्फ ‘बबुआ’ आखिरकार राजस्थान पुलिस के शिकंजे में आ गया है। पुलिस के अनुसार, बबुआ पर पिछले करीब 10 वर्षों में 6 राज्यों में 400 किलो से अधिक सोना लूटने के गंभीर आरोप हैं।
राजसमंद जिले की कांकरोली थाना पुलिस ने उसे ओडिशा से प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुबोध सिंह ने अपने गिरोह के साथ वर्ष 2018 तक जयपुर, पुणे, नागपुर, बैरकपुर समेत कई शहरों में बड़ी वारदातों को अंजाम देकर दहशत फैलाई थी।
बिहार का रहने वाला है ‘बबुआ’
पुलिस जांच में सामने आया है कि सुबोध सिंह उर्फ बबुआ बिहार के नालंदा जिले के चिस्तीपुर गांव का निवासी है। वह 12वीं पास है और उसने वर्ष 1996 से अपराध की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती दौर में वह छोटे अपराधी नेटवर्क के साथ वारदातें करता रहा।
चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 1999 तक वह पुलिस का मुखबिर भी रह चुका है। हालांकि, बाद में उसने अपराध की राह पकड़ ली और जेल में रहते हुए उसने अपने गिरोह को और अधिक संगठित व मजबूत किया।
बड़ी लूट की सटीक प्लानिंग करता था
पुलिस के अनुसार, बबुआ हर वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी रणनीति तैयार करता, गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां देता और फिर सुनियोजित तरीके से लूट को अंजाम दिलवाता था।
प्रत्येक लूट में गिरोह द्वारा 15 से 30 किलो तक सोना हड़प लिया जाता था। इसके बाद लूटा गया सोना नेपाल और पश्चिम बंगाल ले जाकर गलाया जाता और फिर उसे बाजार में बेचकर रकम ठिकाने लगाई जाती थी।
कांकरोली लूट केस में भी नाम आया सामने
सुबोध सिंह की गिरफ्तारी का बड़ा आधार 23 अगस्त 2023 को कांकरोली में हुई चर्चित लूट की घटना बनी। इस दिन कांकरोली स्थित रूपम गोल्ड ज्वेलर्स में चार बाइक सवार बदमाशों ने धावा बोलकर 3 किलो सोना और 18 लाख रुपये नकद लूट लिए थे।
इस मामले में पुलिस ने सुबोध सिंह समेत दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि सुबोध के खिलाफ दर्ज मामलों में लूटे गए सोने की कुल मात्रा लगभग 400 किलो तक पहुंचती है।
पुलिस का दावा—गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचेगी जांच
कांकरोली थाने के सीआई सरोज बैरवा ने बताया कि लंबे समय से चल रही जांच और सटीक रणनीति के बाद सुबोध सिंह को गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस का अगला लक्ष्य गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें भी गिरफ्तार करना है।
