
देहरादून: उत्तराखंड में देहरादून के धौलास इलाके में इस्लामिक संस्था को दी गई भूमि का मामला फिर गरमाया है। कांग्रेस सरकार के तहत वर्ष 2004 में शेख-उल-हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट को इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के पास 20 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। अब आरोप है कि इस भूमि को प्लॉटिंग कर मुस्लिम समुदाय को बेचा जा रहा है, जिससे इलाके में डेमोग्राफी चेंज की संभावना सामने आई है।
मामले का विवरण:
ट्रस्ट का उद्देश्य इस्लामिक शिक्षण संस्थान या मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलना था। ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. महमूद हसन मदनी ने इसे देवबंद दारुल उलूम की तर्ज पर तैयार करने की योजना बनाई थी। भूमि के आवंटन के समय IMA ने आपत्ति जताई और हाई कोर्ट ने निर्देश दिए कि भूमि का लैंड यूज चेंज नहीं किया जाएगा। यह जमीन कृषि भूमि ही रहेगी और यदि बेची भी गई तो प्राप्त राशि केवल सामाजिक कार्यों में ही उपयोग होगी।
हालाँकि, ट्रस्ट ने रईस अहमद को पावर ऑफ अटॉर्नी देकर भूमि का प्लॉटिंग कर Muslim समुदाय को बिक्री करना शुरू कर दिया। अब तक लगभग 70-80 लोगों को बड़े भूखंड बेच दिए गए हैं। डीएम देहरादून सविन बंसल ने बताया कि उल्लंघन पाए जाने पर यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं और पूरी जमीन को राज्य सरकार के अधीन करने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
राजनीतिक पहलू:
यह मामला विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों के बीच गरमाया है। बीजेपी ने इसे डेमोग्राफी चेंज की साजिश बताया, जबकि कांग्रेस ने पुराने विवादों का हवाला देते हुए इस पर बयानबाजी शुरू कर दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में वीडियो के माध्यम से आया है और जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष:
देहरादून का यह विवाद सिर्फ भूमि आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मामला बन गया है। प्रशासनिक जांच और न्यायिक निर्देशों के बावजूद भूमि पर प्लॉटिंग और बिक्री के मामले ने इसे और जटिल बना दिया है।
