
इंफाल/उखरुल: मणिपुर में नई सरकार बनने के बाद शांति की उम्मीद जगी थी, लेकिन राज्य के पहाड़ी इलाकों में फिर से तनाव फैल गया है। उखरुल, नगा और कुकी-जो क्षेत्रों में दोनों समुदायों ने एक-दूसरे के घरों में आग लगाई, जिससे हालात और भयावह हो गए। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इंटरनेट सेवाएं पांच दिनों के लिए बंद कर दी हैं।
डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन विवाद का केंद्र
4 फरवरी को मणिपुर में नई सरकार बनने के बाद युमनाम खेमचंद सिंह मैतेई समुदाय से मुख्यमंत्री बने, जबकि डिप्टी सीएम के रूप में लोसी दिखो (नगा) और नेमचा किपगेन (कुकी-जो) को शामिल किया गया। नेमचा किपगेन की नियुक्ति से कुकी-जो समुदाय में नाराजगी फैल गई। कुकी-जो उग्रवादी समूह कुकी लिबरेशन आर्मी ने सरकार को समर्थन देने वाले कुकी विधायकों को देशद्रोही बताते हुए चेतावनी जारी की।
जातीय पहचान का घालमेल
हालांकि नेमचा किपगेन कुकी-जो समुदाय से हैं, फिर भी उनके थाडू जनजाति से संबंध के कारण कुकी-जो समुदाय ने उन्हें पूरी तरह अपना नेता नहीं माना। थाडू समुदाय ने उनकी नियुक्ति पर खुशी जताई और संवैधानिक पद संभालने वाली पहली थाडू नेता के तौर पर बधाई दी। वहीं, कुकी-जो काउंसिल ने उनका विरोध किया।
भौगोलिक और जनजातीय तनाव
मणिपुर में कुकी-जो और नगा समुदाय की 30 से अधिक जनजातियां रहती हैं, जो पहाड़ी क्षेत्रों में बसे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, इन समुदायों की आबादी राज्य की लगभग 42 प्रतिशत है। मैतेई समुदाय की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी घाटी में रहती है। परंपरागत तौर पर ये जनजातियां अपने-अपने क्षेत्रों में सीमित हैं, लेकिन सत्ता और जातीय पहचान को लेकर वर्षों से संघर्ष जारी है।
हिंसा का नया दौर
4 फरवरी के बाद कुकी-जो समुदाय के उग्र होने से नगा जनजाति ने भी अपनी सीमा में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया। उखरुल जिले में तांगखुल नगा समुदाय पर हमले की घटनाओं के बाद हिंसा भड़क गई और कई मकानों में आग लग गई। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है।
