
मुंबई: वीर सावरकर को भारत रत्न देने को लेकर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई के नेहरू सेंटर में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में इस सवाल पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।
भागवत ने कहा कि वह भारत रत्न देने वाली कमेटी के सदस्य नहीं हैं, लेकिन उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यदि यह सम्मान वीर सावरकर को दिया जाता है, तो भारत रत्न की प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस बड़े सम्मान के बिना भी सावरकर की विरासत भारत और विदेशों में मजबूत बनी हुई है। मोहन भागवत के इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों से समर्थन जताया।
सियासी हलकों में फिर शुरू हुई बहस
मोहन भागवत के बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या जल्द ही वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे मोदी सरकार के लिए संकेत माना कि वे इस पुरस्कार में और देरी न करें। फॉरेन प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी सावरकर के बड़े प्रशंसक हैं और हाल ही में उन्होंने RSS प्रमुख के साथ अंडमान आइलैंड में उनकी मूर्ति का उद्घाटन किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस अवसर पर मौजूद थे।
इतिहास: पहली मांग 2000 में
वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग सबसे पहले 2000 के दशक में उठी थी, जब एनडीए की सरकार आई थी। उस समय विपक्ष के विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया। बाद में, 2015 में शिवसेना ने इस मांग को जोरदार तरीके से उठाया और 2019 के महाराष्ट्र महाविधानसभा चुनावों में बीजेपी ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया। 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उद्धव ठाकरे ने फिर से इस मांग को दोहराया।
वीर सावरकर का जीवन और योगदान
28 मई 1883 को नासिक के पास भगूर गांव में जन्मे वीर सावरकर स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक के साथ-साथ हिंदुत्व के प्रणेता के रूप में जाने जाते हैं। उनका निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ।
