Tuesday, February 10

दीया कुमारी कल पेश करेंगी राजस्थान बजट, जनता की नजरें इन मुद्दों पर टिकीं

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी 11 फरवरी को राज्य का बजट पेश करेंगी। इससे पहले प्रदेश के 41 जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पानी, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और पर्यावरण जैसे मुद्दे हर जिले में अलग-अलग रूप में चुनौती बनकर उभरे हैं। जनता की बड़ी अपेक्षा है कि इस बजट के माध्यम से इन समस्याओं का ठोस समाधान निकले।

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हाइलाइट्स:

  • 41 जिलों की जमीनी हकीकत सामने आई

  • पानी और प्रदूषण सबसे बड़े मुद्दे

  • 8 करोड़ से अधिक आबादी प्रभावित

  • बजट से बड़ी उम्मीदें जनता की

8 करोड़ से अधिक आबादी को राहत की उम्मीद
दीया कुमारी के इस बजट से राजस्थान की 8 करोड़ से अधिक आबादी को राहत की उम्मीद है। यदि बजट में जनता की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रभावी घोषणाएं की जाती हैं, तो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जनता सीधे लाभान्वित हो सकती है। हर जिले की अपनी अलग समस्या और प्राथमिकता नीति निर्धारण के लिए अहम संकेत देती है।

जल संकट से जूझ रहे जिले

जिला प्रमुख जल समस्या
बाड़मेर भीषण पेयजल संकट
जैसलमेर शहर व गांवों में पानी की कमी
जालोर अनियमित जल आपूर्ति
सिरोही जवाई बांध के बावजूद गांव प्यासे
चूरू नहरी पानी नहीं, किसान संकट
अलवर सिलीसेढ़ योजना लंबित
दौसा ईआरसीपी से जुड़ी देरी
श्रीगंगानगर नहरी पानी की अनियमित आपूर्ति

जयपुर से जैसलमेर तक अलग-अलग चुनौतियां
राजधानी जयपुर में अनियंत्रित शहरीकरण लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बाड़मेर और जैसलमेर में पानी की किल्लत गंभीर है। कोटा में चंबल नदी में गंदे नालों का गिरना पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। बीकानेर में धार्मिक स्थलों के बिखरे होने से पर्यटन का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

औद्योगिक प्रदूषण और पर्यावरण संकट

जिला प्रमुख पर्यावरण समस्या
भीलवाड़ा औद्योगिक धुआं, जहरीली हवा
खैरथल–तिजारा फैक्ट्रियों से प्रदूषण
बालोतरा पॉल्यूशन उद्योग, आधारभूत कमी
पाली टेक्सटाइल अपशिष्ट जल
कोटा चंबल नदी में गंदा पानी

सड़क, यातायात और शहरी अव्यवस्था

जिला मुख्य समस्या
जयपुर अनियंत्रित शहरीकरण
राजसमंद बढ़ता यातायात दबाव
बारां राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम
भीलवाड़ा वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम
बहरोड़–कोटपूतली रिंग रोड का अभाव

पर्यटन और रोजगार पर संकट
उदयपुर में झीलों और हेरिटेज स्थलों पर बढ़ता दबाव चिंता का विषय है। भरतपुर में पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा। धौलपुर और डूंगरपुर में उद्योगों की कमी के कारण युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य और प्रशासनिक ढांचा

जिला प्रमुख कमी
प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज अधूरा
फलोदी मेडिकल कॉलेज की मांग
हनुमानगढ़ मिनी सचिवालय नहीं
नागौर प्रशासनिक ढांचे की कमी

हर जिले की एक अलग ‘जरूरत’
पत्रिका की फीडबैक रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि हर जिला अपनी एक अलग ‘जरूरत’ के साथ सरकार की ओर देख रहा है। कहीं बेहतर सड़क और यातायात व्यवस्था की मांग है, तो कहीं स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत।

रोजगार और पलायन की समस्या

जिला स्थिति
धौलपुर उद्योगों का अभाव
डूंगरपुर रोजगार नहीं, पलायन
बूंदी स्टोन उद्योग संकट में
चूरू कृषि संकट से रोजगार प्रभावित

निष्कर्ष:
आने वाला बजट राजस्थान की जनता की मूलभूत समस्याओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। वित्त मंत्री दीया कुमारी से जनता यही उम्मीद रखती है कि जल संकट, प्रदूषण, सड़क और रोजगार जैसे मुद्दों का स्थायी समाधान इस बजट में नजर आएगा।

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