
मुंबई: महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मंगलवार को मुंबई स्थित महाराष्ट्र सरकार की मंत्रालय बिल्डिंग में जाकर डिप्टी चीफ मिनिस्टर का कार्यभार संभाला। कार्यभार ग्रहण करने से पहले सुनेत्रा पवार सिद्धिविनायक मंदिर और फिर बाबासाहेब अंबेडकर की चैत्यभूमि पहुंचीं। इस दौरान वे काफी भावुक नजर आईं।
सुनेत्रा पवार ने मंत्रालय में अजित पवार की कुर्सी देख कर श्रद्धा और भावुकता व्यक्त की। अजित पवार 28 जनवरी को बारामती में चार्टर्ड प्लेन हादसे में निधन हो गए थे। हादसे के चौथे दिन, 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सोमवार को तेहरवीं के कार्यक्रम के बाद उन्होंने सुबह मंत्रालय पहुंचकर पहली बार अजित दादा की कुर्सी पर बैठीं। इससे पहले उन्होंने दिवंगत दादा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कुर्सी को प्रणाम किया।
सुनेत्रा पवार ने डिप्टी सीएम का पद संभालते ही अजित पवार के केबिन में लगी मूर्ति को श्रद्धांजलि दी और भावुक हो गईं। इस मौके पर उनके बेटे पार्थ पवार भी भावुक नजर आए। वहां मौजूद अन्य नेताओं और कर्मचारियों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।
सिद्धिविनायक और चैत्यभूमि का दौरा
मंत्रालय पहुंचने से पहले सुनेत्रा पवार सिद्धिविनायक मंदिर गईं, जहां उन्होंने बप्पा के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे बाबासाहेब अंबेडकर को पुष्प अर्पित करने चैत्यभूमि गईं। वहां उन्हें संविधान की प्रति और कलम भेंट की गई। इसके बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री का कार्यभार ग्रहण किया।
सुनेत्रा पवार ने इसके पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दफ्तर में अजित पवार की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर एनसीपी के कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख सुनील तटकरे, पार्थ पवार, पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे, शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ, महिला आयोग की चेयरमैन रुपाली चाकणकर और अन्य मंत्री व विधायक मौजूद थे।
महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम
सुनेत्रा पवार राज्य की 13वीं डिप्टी सीएम हैं और इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। वे पहले राज्यसभा की सांसद रही हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि वे बारामती से चुनाव लड़ेंगी। अजित पवार बारामती से विधायक थे, उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई।
सुनेत्रा पवार का जन्म धाराशिव (पहल उस्मानाबाद) में हुआ। उनके कार्यभार ग्रहण करने के इस ऐतिहासिक मौके ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई मिसाल कायम की है।
