
बीजिंग/इस्लामाबाद: पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा क्षेत्र का सहयोग भारत के लिए लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। हालिया महीनों में पाकिस्तान ने चीन की मदद से बनाए JF-17 फाइटर जेट की बिक्री और निर्यात की गतिविधियों को तेज कर दिया है। इन जेटों के बहाने पाकिस्तान ने मुस्लिम बहुल देशों के साथ रणनीतिक संपर्क भी बढ़ाए हैं।
मुनीर और पाकिस्तानी सेना की मजबूती
पाकिस्तान में सेना ने देश की अंदरूनी राजनीति में बिना तख्तापलट के सभी अहम फैसले लेने की ताकत हासिल कर ली है। मौजूदा आर्मी चीफ असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान की सेना अंदरूनी मजबूती और बाहरी सपोर्ट के साथ क्षेत्र में भारत के खिलाफ एक कठोर रणनीति अपनाती दिख रही है।
JF-17 फाइटर जेट का वैश्विक असर
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पाकिस्तान ने लीबिया, सूडान, सऊदी अरब, अज़रबैजान, नाइजीरिया और बांग्लादेश को JF-17 फाइटर जेट बेचने या बेचने की बातचीत की है।
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यह जेट पाकिस्तान को क्षेत्रीय शक्ति और वैश्विक प्रभाव दिखाने का अवसर देता है।
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चीन के साथ मिलकर बनाए गए JF-17 ने पाकिस्तान को हाई-एंड मिलिट्री एयरक्राफ्ट में ग्लोबल प्रतियोगी बनने का मौका दिया है।
चीन का रणनीतिक मकसद
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चीन ने पाकिस्तान को मजबूत किया ताकि वह भारत के खिलाफ एक ‘सेकेंडरी डिटरेंट’ का काम कर सके।
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JF-17 के निर्यात के जरिए चीन-पाकिस्तान सहयोग, चीन के रणनीतिक असर को यूरेशिया क्षेत्र में बढ़ाता है।
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चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश करके उसे अपनी यूरेशियन महत्वाकांक्षा का हिस्सा बनाया है।
भारत के लिए चुनौती
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भारत दो मोर्चों पर खतरे का सामना कर रहा है: एक पाकिस्तान, दूसरा चीन।
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पाकिस्तान का उभरता डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम और चीन-पाकिस्तान का स्ट्रेटेजिक इकोसिस्टम पूरे क्षेत्र में भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहा है।
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भारत को अपने सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए लगातार कदम उठाने होंगे
