
नई दिल्ली: अगर आप सिर्फ एफडी, शेयर मार्केट, सोना-चांदी या प्रॉपर्टी में निवेश कर थक गए हैं, तो म्युनिसिपल बॉण्ड आपके लिए नया अवसर बन सकते हैं। हाल ही में केंद्रीय बजट ने इस उभरते बाजार को बढ़ावा दिया है।
कमाई का नया विकल्प
बजट में प्रस्ताव है कि यदि कोई नगर निगम 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करता है, तो उसे 100 करोड़ रुपये का इंसेंटिव मिलेगा। वहीं छोटे बॉण्ड्स (200 करोड़ रुपये तक) के लिए AMRUT सपोर्ट जारी रहेगा। इसका उद्देश्य बड़े शहरों को सरकारी अनुदान या बैंक लोन पर निर्भर रहने के बजाय पूंजी बाजार से पैसा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
म्युनिसिपल बॉण्ड क्या हैं?
इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, म्युनिसिपल बॉण्ड एक तरह के कर्ज़ के दस्तावेज होते हैं। नगर निगम इन्हें सड़कों, पानी की सप्लाई, सफाई और शहरों के विकास के लिए जारी करते हैं। निवेशकों को इसमें शहर की कमाई से स्थिर रिटर्न मिलता है।
क्यों बढ़ रहा है आकर्षण?
विशेषज्ञों का कहना है कि AAA रेटिंग वाले सरकारी या कॉरपोरेट बॉण्ड के मुकाबले म्युनिसिपल बॉण्ड 0.75%–1% अधिक रिटर्न देते हैं। फिलहाल यह 8%–8.5% रिटर्न दे रहे हैं, जो एफडी से भी बेहतर हैं। निवेशक इन्हें खरीदते ही जल्दी बुक कर लेते हैं।
अभी क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि म्युनिसिपल बॉण्ड तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए निवेश होता है। इसका मतलब आम निवेशक आसानी से इसमें हिस्सा नहीं ले पाते।
दूसरी चुनौती है बॉण्ड्स की लिक्विडिटी। साल 2025 में कुल ट्रेडिंग सिर्फ 175 करोड़ रुपये रही। निवेशक इन्हें अक्सर मैच्योरिटी तक रखते हैं, क्योंकि बाजार में तुरंत बेचना आसान नहीं होता।
भविष्य का परिदृश्य
केंद्रीय बजट में 100 करोड़ रुपये प्रोत्साहन के ऐलान से यह स्थिति बदल सकती है। आने वाले समय में बाजार में इन बॉण्ड्स की खरीद-फरोख्त बढ़ सकती है, और यह निवेशकों के लिए एक कम जोखिम वाला, स्थिर रिटर्न वाला विकल्प बन सकता है।
