विजय गोयल ने कहा कि चार प्रकार के कैदियों को जमानत पर छोड़ने पर विचार होना चाहिए.

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विजय गोयल ने कहा कि चार प्रकार के कैदियों को जमानत पर छोड़ने पर विचार होना चाहिए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली की तीन बड़ी जेलों तिहाड़, मंडोली व रोहिणी में ज्यादा से ज्यादा 10 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है लेकिन वहां पर 20 हज़ार कैदी हैं जिसके कारण कोरोना की दूसरी लहर से इनमें तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा है.

नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने उपराज्यपाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल (Arvind kejriwal) को पत्र लिख कर मांग की है कि कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus pandemic) के मद्देनजर दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों की भीड़ को कम किया जाए. विजय गोयल का कहना है कि जेल में भी कैदियों को अपने स्वास्थ्य व जीवन का अधिकार है. गोयल ने कहा कि कैदियों में संक्रमण न फैले इसीलिए जिन कैदियों ने घृणित अपराध नहीं किए हैं उनकी समीक्षा कर उन्हें आंतरिक जमानत या पेरोल पर छोड़ा जाए. गोयल ने कहा कि दिल्ली की तीन बड़ी जेलों तिहाड़, मंडोली व रोहिणी में ज्यादा से ज्यादा 10 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है लेकिन वहां पर 20 हज़ार कैदी हैं जिसके कारण कोरोना की दूसरी लहर से इनमें तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा है. गोयल ने कहा कि पिछले साल मार्च में 6 हज़ार कैदी आंतरिक जमानत पर छोड़े गए थे उनके वापिस आ जाने से जेलों में अब फिर भीड़ हो गयी है. 200 कैदी और 300 स्टाफ कोरोना संक्रमण की चपेट में एक रिपोर्ट के अनुसार अभी लगभग 200 कैदी और 300 का स्टाफ कोरोना संक्रमण की चपेट में है और पिछले दिनों 4 कैदियों की मृत्यु भी हो गयी थी. गोयल ने कहा कोरोना की पहली लहर के थोड़ा थमने पर न्यायालय ने जो हाई पावर समिति बनायीं थी, उसने और कैदियों को जमानत पर छोड़ने से अब क्यों मना कर दिया जबकि पता था की दूसरी लहर आ सकती है.इन कैदियों को जमानत दिए जाने की वकालत विजय गोयल ने कहा कि चार प्रकार के कैदियों को जमानत पर छोड़ने पर विचार होना चाहिए. पहला जिन्होंने घृणित अपराध न किया हो, दूसरा विधारधीन कैदी जिसने अपनी कुल सजा का आधा वक्त जेल में काट लिया हो. तीसरा वे कैदी जिन्होंने अच्छा व्यवहार करते हुए समर्पण किया हो और चौथा जिन कैदियों को पहले छोड़ा हो और वो वापस आ गए हों.

विजय गोयल ने मांग की उपराज्यपाल दिल्ली सरकार से विचार विमर्श कर तुरंत इस पर फैसला करें, क्योंकि दिल्ली में जेलों की स्थिति बहुत ही सोचनीय है. गोयल ने उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार जेल नियमों में आवश्यक संशोधन करें ताकि कैदियों को कोविड से बचाया जा सके यदि यह समय रहते नहीं किया गया तो ऑक्सीजन की कमी जैसे हालत होंगे. गोयल ने कहा वे स्वयं 1975 के आपातकाल में तीन महीने तिहाड़ जेल में रह चुके हैं. इसीलिए उनको जेलों की स्थिति का पता है कैदियों को अविलम्भ स्टीमर, मास्क, सैनिटाइजर एवं दवाइयां उपलब्ध हो ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए .







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