
पुणे नगर निगम (PMC) को चार साल के अंतराल के बाद नया महापौर मिल गया है। बीजेपी की मंजुषा नागपुरे को निर्विरोध पुणे का महापौर चुना गया है। वहीं, डिप्टी मेयर का पद रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के परशुराम वाडेकर को मिला।
शांतिपूर्ण और निर्विरोध चुनाव
पुणे में महापौर चुनाव सोमवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अंतिम क्षण में एनसीपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा पार्षद मंजुषा नागपुरे निर्विरोध महापौर बन गईं।
बीजेपी के PMC समूह नेता गणेश बिडकर ने चुनाव से पहले अपील की थी कि दिवंगत महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाडी के सम्मान में राजनीतिक दल चुनाव न लड़ें। उनके आग्रह के बाद एनसीपी की शीतल सावंत और कांग्रेस की अश्विनी लांडगे ने नाम वापस ले लिया।
डिप्टी मेयर का पद आठवले की पार्टी को
चार साल के अंतराल के बाद संपन्न हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। डिप्टी मेयर का पद परशुराम वाडेकर को मिला, जो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के नेता हैं।
बीजेपी का दावा और महिला प्रतिनिधित्व
केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पहले ही विश्वास जताया था कि भाजपा पुणे नगर निगम में महापौर का पद फिर से हासिल करेगी। उन्होंने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के विकास कार्यों को इसका आधार बताया।
बीजेपी ने महिला प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया। 50 प्रतिशत आरक्षण के बावजूद, पार्टी ने 92 महिला उम्मीदवारों को टिकट आवंटित किया, जो महिला सशक्तिकरण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सीट बंटवारे के संबंध में मुरलीधर मोहोल ने कहा कि भाजपा पुणे में शिवसेना को 16 सीटें देने के लिए तैयार है और स्थानीय स्तर पर गठबंधन में मतभेदों को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व में सुलझा लिया गया है।