
ग्रेटर नोएडा में दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत विकसित इंटिग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप (IITGNL) में पहली बार ग्रुप हाउसिंग योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत चार बड़े भूखंडों पर बहुमंजिला आवासीय सोसायटियों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें करीब 10 हजार फ्लैट्स खरीदारों के लिए उपलब्ध होंगे।
खासियत – लिव–वर्क–प्ले कॉन्सेप्ट
टाउनशिप का लिव–वर्क–प्ले कॉन्सेप्ट इसे विशेष बनाता है। इसका मतलब है कि घर, काम और बाजार सब कुछ एक ही परिसर में होगा। इससे कर्मचारियों को लंबा सफर तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और “वॉक टू वर्क” की सोच हकीकत में बदल जाएगी।
औद्योगिक गतिविधियां और बढ़ती आवासीय मांग
IITGNL टाउनशिप में अब तक 26 से अधिक बड़ी कंपनियों ने निवेश किया है। यहां काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आवासीय मांग को देखते हुए प्राधिकरण ने पहली बार इस ग्रुप हाउसिंग योजना को लागू किया है।
योजना के तहत चार भूखंड, जिनका आकार 34,573 वर्गमीटर से लेकर 93,905 वर्गमीटर तक है, ई-नीलामी के माध्यम से आवंटित किए जाएंगे। इन भूखंडों पर विकसित सोसायटियों में आधुनिक सुविधाओं से लैस फ्लैट्स बनाए जाएंगे। टाउनशिप में बिजली, पानी, सड़क, ड्रेनेज और अन्य बुनियादी ढांचा पहले से ही विश्वस्तरीय स्तर का है।
पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया
इस योजना के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 2 फरवरी से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 23 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। IITGNL प्राधिकरण को उम्मीद है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स और निवेशकों से योजना को अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा।
IITGNL के सीईओ रवि कुमार एनजी का कहना है कि यह योजना न केवल कर्मचारियों को परिसर के भीतर ही आवास उपलब्ध कराएगी, बल्कि टाउनशिप को भविष्य में एक पूर्ण एकीकृत आवासीय और औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना ग्रेटर नोएडा को स्मार्ट सिटी और इंडस्ट्रियल हब के रूप में नई पहचान दिलाएगी।