
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में चाइनीज और नायलॉन मांझे से हो रहे हादसों ने एक बार फिर प्रशासन और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते तीन दिनों में मांझे की चपेट में आकर एक युवक की मौत और दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी प्रतिबंधित मांझे की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
जहां प्रशासन स्थानीय दुकानों पर छापेमारी कर कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स साइट्स और निजी वेबसाइट्स पर जानलेवा मांझा खुलेआम बिक रहा है, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम बिक्री
जानकारी के मुताबिक, प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नायलॉन मोनोफिलामेंट, मोनो काइट डोरी और सुपर शार्प मांझा जैसे उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 200 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक बताई जा रही है और इन्हें “अत्यधिक धारदार” और “बेहद मजबूत” बताकर बेचा जा रहा है।
इतना ही नहीं, कई विक्रेताओं ने अपनी निजी वेबसाइटें बनाकर भी प्रतिबंधित मांझे की बिक्री शुरू कर दी है।
इन वेबसाइट्स पर उपलब्ध है प्रतिबंधित मांझा
सूत्रों के अनुसार, कुछ वेबसाइटों पर अब भी प्रतिबंधित मांझा बेचा जा रहा है। इनमें—
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amazon.in पर नायलॉन मोनोफिलामेंट मांझा
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PatangDori.com पर मोनो नायलॉन पतंग डोरी
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bablakites.com पर सुपर शार्प मांझा
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bareillymanjha.co.in पर केमिकल व नायलॉन मिश्रित मांझा
जैसे उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं।
24 घंटे में तीन हादसों ने बढ़ाई चिंता
लखनऊ में लगातार हो रही घटनाओं ने प्रशासन की सख्ती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोमतीनगर विस्तार में बिजली विभाग के कर्मचारी सुधीर मांझे की चपेट में आकर घायल हो गए। इससे पहले शहीद पथ पर सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी बृजेश राय भी चीनी मांझे से गंभीर रूप से जख्मी हुए थे।
इन हादसों से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रतिबंध के बावजूद यह जानलेवा मांझा लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बना हुआ है।
ब्लेड और तलवार जैसी धार, बन रहा मौत का कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल मांझे में जरूरत से ज्यादा शीशा, धातु पाउडर और केमिकल मिलाया जा रहा है। कई मामलों में शराब की बोतलों और ट्रेन की हेडलाइट के हार्ड ग्लास को पीसकर धागे पर मढ़ा जाता है, जिससे यह मांझा ब्लेड की तरह काटता है।
यह खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।
सस्ता और मजबूत होने से बढ़ रही मांग
पतंग विक्रेताओं के अनुसार, पारंपरिक सूती धागे से बना मांझा अपेक्षाकृत सुरक्षित होता है क्योंकि वह दबाव पड़ने पर टूट जाता है। लेकिन नायलॉन और केमिकल से बना मांझा बेहद मजबूत होता है और जल्दी नहीं टूटता, जिससे यह जानलेवा बन जाता है। यही कारण है कि ऑनलाइन इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
बरेली बना धारदार मांझे का बड़ा केंद्र
पतंगबाजों का दावा है कि बरेली इस तरह के खतरनाक मांझे का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां से 100 से 500 रुपये तक की फिरकी तो सामान्य रूप से मिल जाती है, जबकि चाइनीज और धारदार मांझा चोरी-छिपे 300 से 1500 रुपये में बेचा जा रहा है।
पतंग क्लबों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
वरिष्ठ पतंगबाजों और पतंग क्लबों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल चाइनीज मांझे ही नहीं, बल्कि अत्यधिक धारदार मांझा बनाने, बेचने और इस्तेमाल करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खुलेआम मौत बांटने जैसा अपराध है।
प्रशासन के लिए बड़ा सवाल
लगातार हो रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि जब तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री बंद नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों पर रोक लगाना मुश्किल रहेगा। अब जरूरत है कि प्रशासन ई-कॉमर्स कंपनियों और निजी वेबसाइटों पर भी सख्ती से कार्रवाई करे, ताकि यह “मौत का मांझा” किसी और की जान न ले सके।