
जबलपुर (मोनिका पांडेय, आकाश सिकरवार): मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कानूनी अधिकार का प्रयोग करके की गई आपराधिक शिकायत मानहानि नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर न्यायालय ने भोपाल जिला अदालत में चल रही मानहानि की आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
मामला तलाकशुदा पत्नी की शिकायत से जुड़ा:
भोपाल के सैयद राशिद अली की तलाकशुदा पत्नी ने अपने पूर्व पति के खिलाफ धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज किया था। पत्नी का आरोप था कि अली ने झूठे आरोप लगाकर उनके और रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा और समाज में बदनामी हुई।
पृष्ठभूमि:
अली पर उनकी पत्नी ने शादी के बाद झगड़े के सिलसिले में धारा 498A के तहत केस दर्ज करवाया था, जिसमें उन्हें एक साल की सजा हुई थी। बाद में अपीलीय अदालत ने अली को बरी कर दिया। इसके बाद पत्नी ने अली और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई, जिसे लेकर भोपाल की अदालत ने आपराधिक कार्यवाही शुरू की।
जस्टिफिकेशन और हाईकोर्ट का निर्णय:
अली की याचिका में तर्क रखा गया कि उनकी आपराधिक शिकायत धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत आती है, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति सही नीयत और कानूनी अधिकार के तहत किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत करता है, तो उसे मानहानि नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट का आदेश:
जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के तर्क को मानते हुए कहा कि मामला धारा 499(8) के तहत आता है और इसलिए अली के खिलाफ मानहानि का कोई अपराध नहीं बनता। इसके चलते भोपाल जिला अदालत में धारा 500 के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई।