
नीमच (मुनेश्वर कुमार, राकेश मालवीय): मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में आंगनवाड़ी केंद्र पर हुए मधुमक्खियों के हमले के दौरान बच्चों की जान बचाते हुए रसोइया कंचनबाई मेघवाल ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। घटना ने पूरे इलाके को शोक में डाल दिया।
कंचनबाई की बहादुरी:
सोमवार को जब मधुमक्खियों का झुंड बच्चों पर हमला करने आया, तब कंचनबाई ने अपने शरीर को झोंकते हुए मासूमों को दरी और चटाई के नीचे छिपाया। उनकी बहादुरी से बच्चों की जिंदगी बच गई, लेकिन शरीर में जहर भर जाने के कारण इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
सीएम ने मुआवजे की घोषणा की:
कंचनबाई की शहादत के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवार को चार लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएगी।
विभाग की खामियों पर सवाल:
घटना के बाद महिला बाल विकास और शिक्षा विभाग ने कंचनबाई की बहादुरी को नकारने का आपत्तिजनक खंडन जारी किया। बताया गया कि यह झूठ इस कारण फैलाया गया ताकि दो शिक्षिकाओं की गैर-हाजिरी और लापरवाही पर पर्दा डाला जा सके। विरोध के बाद विभाग को अपना खंडन हटाना पड़ा।
आंगनवाड़ी केंद्र और प्रशासन की लापरवाही:
स्कूल और आंगनवाड़ी परिसर में झाड़ियां और कचरा पड़े होने के कारण मधुमक्खियों का बसेरा बन गया था। चार दिन तक जिस छत्ते ने कंचनबाई की जान ली, उसे हटाया नहीं गया। सरकारी इमारतों को छोड़कर बच्चों को एक निजी प्लॉट में पढ़ाया जा रहा है।
परिवार का सहारा खो गया:
कंचनबाई अपने लकवे से पीड़ित पति शिवलाल और तीन बच्चों की इकलौती सहारा थीं। उनका निधन परिवार के लिए अपूरणीय क्षति लेकर आया है।
बच्चों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया:
प्रत्यक्षदर्शी छात्राओं ने बताया कि कंचनबाई न होतीं तो परिणाम भयावह होता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक लापरवाह शिक्षिकाओं पर कार्रवाई नहीं होती और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा।
नीमच की यह घटना न केवल बहादुरी और त्याग का प्रतीक है, बल्कि प्रशासन और विभाग की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।