
नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 से जुड़े नियमों और फॉर्म्स को इसी महीने जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने नवभारत टाइम्स को विशेष साक्षात्कार में बताया कि यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
अग्रवाल ने कहा, “पहले हमने भाषा को सरल बनाया, अब नियम और फॉर्म्स में बदलाव किए जा रहे हैं। फरवरी में इन सभी फॉर्म्स को नोटिफाई कर दिया जाएगा। कई फॉर्म्स को स्मार्ट बनाया गया है और कुछ फॉर्म्स को खत्म किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य करदाताओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाना और प्राप्त आंकड़ों का बेहतर उपयोग करना है।”
फॉर्म्स में बदलाव:
आईटीआर फॉर्म्स में ज्यादा बदलाव नहीं होंगे, लेकिन 15C, 15CC, फॉर्म 60, 61, 80G, 80GG, ऑडिट फॉर्म, फॉरेन टैक्स क्रेडिट, और ट्रस्ट/एनपीओ से जुड़े फॉर्म्स में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। ये फॉर्म वित्त वर्ष 2026-27 की इनकम से संबंधित रिटर्न फाइलिंग के लिए होंगे।
ओल्ड टैक्स रिजीम का भविष्य:
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए 88% करदाता न्यू टैक्स रिजीम में आ चुके हैं। आईटीआर-4 में 97% करदाता, और कॉरपोरेट इनकम का 60% अब न्यू टैक्स रिजीम के अंतर्गत आ गया है।
विदेशी संपत्ति की रिपोर्टिंग:
बजट में विदेशी संपत्ति की जानकारी 6 महीने के भीतर देने की सुविधा के बारे में अग्रवाल ने बताया कि यह उन लोगों को मौका देने के लिए है, जिन्होंने अनजाने में जानकारी नहीं दी थी। लिमिट 1 करोड़ रुपये या 5 करोड़ रुपये की संपत्ति तक रखी गई है। अगर किसी ने विदेशी बैंक खाते का ब्याज या ESOP की जानकारी नहीं दी, तो इसे ब्लैक मनी मानने की बजाय एक अवसर के रूप में देखा जाएगा।
करदाताओं को मदद और जागरूकता:
अग्रवाल ने बताया कि SAKSHAM अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में लगभग 8800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर वसूला गया है। यह अभियान करदाताओं को नियमों की जानकारी देने, समझाने और पालन में मदद करने पर केंद्रित है।