
मॉस्को: दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियारधारक देशों अमेरिका और रूस के बीच न्यू START संधि गुरुवार, 5 फरवरी को समाप्त हो गई। इस समझौते के खत्म होने के बाद अब दोनों देशों के पास न्यूक्लियर हथियारों की कोई सीमा नहीं है। इससे वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की दौड़ तेज होने और दुनिया पर तबाही का खतरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
न्यू START संधि क्या थी?
स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) को 2010 में रिन्यू किया गया था। इसके तहत अमेरिका और रूस को अपने स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर हथियारों की संख्या और तैनाती पर सीमा रखनी होती थी। इसके अलावा, मिसाइलों की ऑन-साइट जांच और स्ट्रेटेजिक फोर्स की जानकारी साझा करना इस समझौते का हिस्सा था।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के दिमित्री मेदवेदेव ने इसे 2010 में साइन किया था। लेकिन हालिया अमेरिका-रूस सरकारों ने इसे रिन्यू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया कि वे अब इस डील को आगे नहीं बढ़ाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र और पोप की चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने अमेरिका और रूस से इस डील को रिन्यू करने का आग्रह किया।
साथ ही पोप ने भी दोनों देशों से अपील की कि नई न्यूक्लियर होड़ को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएं।
क्या शुरू होगी नई परमाणु होड़?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और रूस की यह घोषणा 1970 की न्यूक्लियर अप्रसार संधि (NPT) के लिए भी खतरे की घंटी है। NPT के तहत जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, उन्होंने इन्हें बनाने से परहेज़ करने का वादा किया है।
अब अमेरिका और रूस अपने हथियार बढ़ाते हैं, तो अन्य गैर-परमाणु देश भी इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। इससे वैश्विक परमाणु संतुलन बिगड़ने का खतरा है।
अमेरिका-रूस की बढ़ती होड़
पिछले साल रूस ने पोसीडॉन न्यूक्लियर-पावर्ड सुपर टॉरपीडो और न्यूक्लियर पावर्ड क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया। वहीं अमेरिका ने लंबी दूरी के हथियारों से बचने के लिए गोल्डन डोम बनाने की योजना तेज कर दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस होड़ में चीन जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं, जिसने हाल के वर्षों में अपने परमाणु भंडार को तेज़ी से बढ़ाया है।
निष्कर्ष: न्यू START संधि के खत्म होने से वैश्विक सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अमेरिका और रूस नई परमाणु हथियारों की दौड़ में आगे बढ़ते हैं, तो यह दुनिया के लिए सबसे बड़े खतरे का कारण बन सकता है।