
टोक्यो: जापान ने समुद्र तल से दुर्लभ खनिजों वाले गहरे तलछट को सफलतापूर्वक निकालकर एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है। इसे जापानी मीडिया में ‘जादुई कीचड़’ कहा जा रहा है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि इससे रेयर अर्थ के लिए चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
जापान की सफलता
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बताया कि रिसर्च जहाज चिक्यू ने मिनमिटोरिशिमा (मार्कस द्वीप) के पास 6,000 मीटर की गहराई से तलछट सफलतापूर्वक इकट्ठा की। यह दुनिया में इतनी गहराई से दुर्लभ खनिज निकालने का पहला परीक्षण है।
ताकाइची ने कहा, “यह जापान में घरेलू स्तर पर दुर्लभ खनिजों के औद्योगीकरण की दिशा में पहला कदम है। हम किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने का प्रयास करेंगे।”
कीचड़ में क्या है खास
प्रारंभिक जांच में पता चला कि निकाले गए कीचड़ में डिस्प्रोसियम, नियोडिमियम, गैडोलिनियम और टर्बियम जैसे दुर्लभ खनिज हैं।
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डिस्प्रोसियम और नियोडिमियम: इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट के लिए महत्वपूर्ण।
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गैडोलिनियम और टर्बियम: इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल इमेजिंग और रक्षा तकनीक में उपयोगी।
टर्बियम और मोनाजाइट के नमूने पेरिस की लैब भेजे गए हैं, जहां उनकी वैज्ञानिक जांच की जाएगी।
अगला कदम: बड़े पैमाने पर खनन
जापान ने संकेत दिए हैं कि यदि कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं आती है, तो अगले साल फरवरी से समुद्री खनन परीक्षण शुरू किया जाएगा। यदि निष्कर्षण, अलगाव और शोधन की प्रक्रिया लागत प्रभावी साबित होती है, तो जापान बड़े स्तर पर खनन कर सकता है।
चीन पर असर
चीन वर्तमान में वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी आपूर्ति पर हावी है और उसने हाल ही में जापान पर कई निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं। जापान की यह सफलता चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक संसाधनों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।