
अक्सर लोग मूंगफली के छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं या सीधे गमलों में डाल देते हैं। लेकिन मशहूर पर्यावरणविद् पीपल बाबा के अनुसार, यह पौधों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। छिलकों का सही इस्तेमाल खाद बनाकर करना चाहिए।
सीधे डालने से क्यों होती है समस्या?
मूंगफली के छिलके बहुत सख्त होते हैं। जब इन्हें सीधे मिट्टी में डालते हैं:
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ये मिट्टी की नमी सोख लेते हैं और धीरे गलते हैं।
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मिट्टी से नाइट्रोजन खींचते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ रुक सकती है।
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इसके नीचे फंगस और चींटियों का खतरा बढ़ जाता है, जो जड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
खाद बनाने की तैयारी
पीपल बाबा बताते हैं कि छिलकों को इकट्ठा करके धो लें (अगर नमक वाली मूंगफली हो तो)। फिर इन्हें कूटकर छोटे टुकड़ों में तोड़ दें। इससे डीकंपोजिशन तेज होती है।
लेयरिंग मेथड अपनाएं
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एक कंपोस्ट बिन या मिट्टी का घड़ा लें।
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सबसे नीचे सूखी पत्तियां या कार्डबोर्ड के टुकड़े बिछाएं।
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उसके ऊपर मूंगफली के छिलकों की मोटी परत डालें।
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इसके ऊपर पुरानी खाद या मिट्टी की परत डालें।
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मिश्रण में थोड़ा गुड़ का पानी या छाछ डालें, यह बैक्टीरिया को एक्टिव करता है।
नमी और ऑक्सीजन का बैलेंस
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समय-समय पर पानी छिड़कें, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं।
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हर 10-15 दिन में मिश्रण को ऊपर-नीचे करें ताकि हवा पहुंचे।
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इस प्रक्रिया से 2-3 महीने में छिलके उपजाऊ खाद में बदल जाते हैं।
खाद का इस्तेमाल
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जब छिलके पूरी तरह काले और भुरभुरे हो जाएं, तो खाद तैयार है।
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इसे पुरानी मिट्टी में मिलाकर नए पौधे लगाएं।
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गमले की ऊपरी मिट्टी हटाकर 2 इंच मोटी परत खाद की बिछा सकते हैं।
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वर्मीकंपोस्ट के साथ मिलाकर मिट्टी को हल्का और हवादार बनाएं।
पीपल बाबा का अतिरिक्त सुझाव – मल्चिंग
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अगर खाद नहीं बनाना चाहते, तो मल्चिंग कर सकते हैं।
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छिलकों को धोकर सुखाएं और गमले के ऊपर की परत के रूप में डालें।
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यह मिट्टी को धूप से बचाता है।
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बरसात के मौसम में मल्चिंग हटा दें, ताकि फंगस का खतरा न रहे।
निष्कर्ष: मूंगफली के छिलके फेंकना या सीधे पौधों में डालना नहीं, बल्कि उन्हें सही तरीके से खाद में बदलकर इस्तेमाल करना ही पौधों और मिट्टी दोनों के लिए लाभकारी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी यूट्यूब वीडियो और इंटरनेट स्रोतों पर आधारित है। एनबीटी इसकी सत्यता की जिम्मेदारी नहीं लेता।