Thursday, February 5

उत्तर भारत के लोगों पर विवादित बयान पर सियासी घमासान, बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना

तमिलनाडु सरकार में कृषि मंत्री और डीएमके नेता एमआरके पन्नीरसेल्वम के उत्तर भारत के लोगों को लेकर विवादित बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। पन्नीरसेल्वम ने कहा कि उत्तर भारतीय केवल हिंदी जानते हैं और इसलिए उन्हें अच्छे काम नहीं मिलते। उनका दावा है कि वे तमिलनाडु आकर पानीपूरी बेचने, निर्माण स्थलों पर काम करने और टेबल साफ करने जैसे कार्य करते हैं।

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बीजेपी ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए डीएमके और इसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर कहा, “इनके जुबान पर संविधान है और मन में नफरत की दुकान। डीएमके के मंत्री ने एक बार फिर उत्तर भारत की महिलाओं और लोगों के खिलाफ विवादित बयान दिया, लेकिन कांग्रेस, सपा और राजद समेत इंडी गठबंधन के नेता चुप हैं।”

पूनावाला ने इसे ‘नफरत का उद्योग’ बताते हुए कहा कि डीएमके के नेताओं के लगातार ऐसे बयान समाज में द्वेष फैलाने वाले हैं। उन्होंने पांच डीएमके नेताओं के कथित विवादित बयान भी साझा किए हैं:

  • एमआरके पन्नीरसेल्वम: उत्तर भारतीय तमिलनाडु में केवल पानीपुरी बेचने, निर्माण स्थलों पर काम करने या मेज साफ करने के लिए आते हैं।

  • दयानिधि मारन (डीएमके सांसद, जनवरी 2026): उत्तर भारत में लड़कियों को घर पर रहने, रसोई में काम करने और बच्चे पैदा करने के लिए कहा जाता है।

  • दुरई मुरुगन (डीएमके मंत्री): उत्तर भारतीय संस्कृति गंदी और घिनौनी है, जिसमें कई पति-पत्नी रखने की प्रथा प्रचलित है।

  • टीआरबी राजा (डीएमके मंत्री, 2025): उत्तर भारत में महिलाओं से सबसे पहले उनके पतियों के पेशे के बारे में पूछा जाता है।

  • विभिन्न डीएमके नेता: हिंदी भाषी/उत्तर भारतीय प्रवासी शौचालय साफ कर रहे हैं।

बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके और इसके सहयोगी दल समाज में उत्तर भारतीयों के प्रति नकारात्मकता और भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं, और विपक्षी नेता इस मुद्दे पर चुप्पी साधकर जनता के सामने जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

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