
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी में रणनीतिक मंथन जारी है। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरवार को दिल्ली में अहम बैठक करेंगे।
बैठक में पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभांकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी और कई वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा यह तय करना है कि पार्टी वाम दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े या अकेले दम पर मैदान में उतरे।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राज्य के अधिकांश नेता इस बार अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं। इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख घटक होने के बावजूद अब तक कांग्रेस और वाम दलों के बीच कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।
यह स्थिति पिछले विधानसभा चुनाव 2021 से बिल्कुल अलग है। उस समय दिसंबर 2020 में दोनों दलों ने पहले ही गठबंधन की घोषणा कर दी थी। हालांकि 2021 में बना संयुक्त मोर्चा कांग्रेस और वाम दलों के लिए पूरी तरह विफल साबित हुआ। गठबंधन को केवल एक सीट मिली, वह भी कांग्रेस या लेफ्ट के खाते में नहीं, बल्कि उनके जूनियर सहयोगी इंडियन सेक्युलर फ्रंट को मिली थी।
कांग्रेस के रणनीतिकार मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में दोबारा राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने के लिए लंबी अवधि की रणनीति पर काम करना जरूरी है। पिछले अनुभवों ने पार्टी को आत्ममंथन और चुनावी रणनीति को लेकर सतर्क कर दिया है।