
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम कम करने के लिए संरचित अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से समन्वित ट्रेडिंग फ्रेमवर्क के निर्माण की अपील की है।
जयशंकर ने वॉशिंगटन में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में अत्यधिक एकाग्रता जोखिम पैदा करती है और इसे कम करने के लिए देशों के बीच समन्वित और संरचित सहयोग जरूरी है।
विदेश मंत्री ने भारत की पहलें जैसे नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर्स और जिम्मेदार वाणिज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी ‘फोर्ज’ पहल का भी समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सहयोगी और साझेदार देशों से वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स बाजार को नया आकार देने का आह्वान किया। वेंस ने कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं अभी भी क्रिटिकल मिनरल्स पर निर्भर हैं, और तेल व गैस जितनी ही इनकी अहमियत है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाएं कमजोर और कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित हैं।
उपराष्ट्रपति वेंस ने प्रेफरेंशियल ट्रेड जोन की भी बात कही, जो सहयोगी और साझेदार देशों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स के सुरक्षित व्यापार का क्षेत्र होगा। यह जोन बाहरी व्यवधानों से सुरक्षित रहेगा और उत्पादन के हर चरण पर तय संदर्भ कीमतों पर आधारित होगा। वेंस ने कहा कि यह पहल कीमतों को स्थिर करने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और दीर्घकालिक योजना संभव बनाने के लिए जरूरी है।
जयशंकर ने कहा कि भारत इस पहल का समर्थन करता है और ग्लोबल सप्लाई चेन में जोखिम कम करने के लिए सहयोगी देशों के साथ समन्वित प्रयासों को आगे बढ़ाएगा।