Wednesday, February 4

चिकननेक कॉरिडोर की सुरक्षा होगी अभेद्य, 24 मीटर गहराई में बनेगी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन

नई दिल्ली। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकननेक) को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। इस संवेदनशील क्षेत्र में रेलवे अब भूमिगत सुरंग के जरिए रेललाइन बिछाने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे किसी भी तरह की बाधा, तोड़फोड़ या सुरक्षा खतरे की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।

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रेल मंत्रालय के अनुसार यह अंडरग्राउंड रेलवे नेटवर्क जमीन से 20 से 24 मीटर की गहराई में तैयार किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर को देश से जोड़ने वाले इस एकमात्र जमीनी मार्ग को हर परिस्थिति में निर्बाध बनाए रखना है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिया संकेत, 40 किमी स्ट्रैटजिक हिस्से पर विशेष योजना

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के मुख्य भूभाग से जोड़ने वाले लगभग 40 किलोमीटर के रणनीतिक सेक्शन के लिए विशेष प्लानिंग की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में चार रेलवे लाइन विकसित करने के साथ-साथ एक अंडरग्राउंड लाइन की भी योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में संपर्क बाधित न हो।

टिन माइल हाट से रंगापानी के बीच बनेगी सुरंग

रेलवे के मुताबिक भूमिगत रेल लाइन पश्चिम बंगाल में टिन माइल हाट और रंगापानी स्टेशन के बीच विकसित की जाएगी। यह इलाका सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां से बांग्लादेश सीमा बेहद करीब है।

एनएफआर (नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से यह अंडरग्राउंड स्ट्रेच काफी महत्वपूर्ण है और भविष्य में यह पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को मजबूती देगा।

बागडोगरा को जोड़ने की योजना, एयर डिफेंस के लिए भी अहम

रेलवे की योजना के अनुसार इस परियोजना के तहत एक भूमिगत लाइन बागडोगरा क्षेत्र को भी जोड़ सकती है, जिसे भारत के एयर डिफेंस और रणनीतिक तंत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है चिकननेक कॉरिडोर

सिलीगुड़ी कॉरिडोर मात्र 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा भू-भाग है, लेकिन इसका महत्व बेहद बड़ा है। यह भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचने का एकमात्र जमीनी मार्ग है।

इस कॉरिडोर के दक्षिण में बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में चीन के कब्जे वाली तिब्बत की चुंबी वैली स्थित है। चुंबी वैली में चीन की सैन्य गतिविधियां बढ़ने के कारण इस क्षेत्र की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

पूर्वोत्तर संपर्क बाधित करने के बयान ने बढ़ाई चिंता

साल 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम द्वारा दिए गए एक कथित बयान ने इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। बयान में पूर्वोत्तर को भारत से अस्थायी रूप से काटने की बात कही गई थी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था।

इसके बाद से इस क्षेत्र में सुरक्षा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की मांग लगातार उठती रही है।

रेलवे का बड़ा संदेश: रणनीतिक गलियारा रहेगा सुरक्षित

रेलवे की यह योजना न केवल पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को मजबूती देगी, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत अपने रणनीतिक गलियारों की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, भूमिगत रेल लाइन बनने से किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, अवरोध या आपातकालीन स्थिति में भी रेल सेवा सुचारू रखने में मदद मिलेगी।

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