
पटना: अक्सर गरीबी और पिछड़ेपन की बहस में घिरे बिहार से परिवहन क्षेत्र को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार वर्ष 2024 में राज्य में 13.95 लाख नए वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो देश में कुल वाहन बिक्री का 5 प्रतिशत से अधिक है। इस उछाल ने न सिर्फ बाजार को गति दी, बल्कि राज्य सरकार को 3678 करोड़ रुपये का राजस्व भी मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक निजी वाहनों के निबंधन में बिहार देश में सातवें स्थान पर रहा, जबकि बस और ट्रक जैसे व्यावसायिक वाहनों की श्रेणी में राज्य ने पांचवां स्थान हासिल किया। राजधानी पटना इस वृद्धि का केंद्र रहा, जहां अकेले 1.66 लाख से अधिक नए वाहन रजिस्टर्ड हुए।
दोपहिया वाहनों की सबसे ज्यादा मांग
सर्वेक्षण के अनुसार 2024 में राज्य में 11.26 लाख दोपहिया वाहनों का पंजीकरण हुआ। इसके अलावा 77 हजार कारें, 78 हजार टैक्सियां और लगभग 45 हजार तिपहिया वाहन सड़कों पर उतरे। कुल बिक्री के मामले में उत्तर प्रदेश पहले और महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन बिहार की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
लाइसेंस जारी करने में भी तेजी
वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में भी तेजी देखी गई है। पिछले पांच वर्षों में बिहार में 21.38 लाख लाइसेंस जारी किए गए। वर्ष 2019-20 में सर्वाधिक 8.72 लाख लाइसेंस बने थे। हालांकि, इसी अवधि में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) के यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निगम का राजस्व 123 करोड़ रुपये से घटकर 113.21 करोड़ रुपये रह गया।
आधुनिक ट्रैफिक ढांचे पर जोर
सरकार ट्रैफिक सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए सभी 38 जिलों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक विकसित कर रही है। साथ ही 74 मोटर ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूल खोलने की योजना है, जिनमें से 35 का निर्माण पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि इससे लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि वाहन खरीद में आई तेजी राज्य में बढ़ती उपभोक्ता क्षमता और शहरीकरण का संकेत है, हालांकि इसके साथ ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी बड़ी चुनौती रहेगा।