
नई दिल्ली: जेरोधा के को-फाउंडर निखिल और नितिन कामथ की मां, रेवती कामथ की कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास का प्रतीक है। आज वह एक सफल जीवन जी रही हैं, लेकिन उनका शुरुआती सफर चुनौतियों और मुश्किलों से भरा था।
रेवती कामथ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने शुरुआती दिनों की एक घटना साझा की, जो आज भी उनके लिए भावुक यादों में शामिल है। उन्होंने बताया कि अपने करियर की शुरुआत में वह फ्रीलांस फ्लोरिस्ट के रूप में काम करती थीं और बैंक्वेट इवेंट्स की सजावट संभालती थीं। एक बार, किसी इवेंट के बाद कर्मचारियों के देर से आने पर उन्हें पिछले दिन की सजावट हटाने के लिए कहा गया। इसी दौरान होटल ने उन पर 300 रुपये का जुर्माना लगा दिया। यह रकम उस समय उनके लिए बहुत बड़ी थी और मेहनत के बाद भी उन्हें यह दंड मिलने से वह भावुक हो गईं।
रेवती ने कहा, “उस समय हर एक रुपया कमाना मुश्किल था। मेरी मेहनत के बावजूद यह जुर्माना मेरे लिए बड़ा झटका था।” उस मुश्किल घड़ी में उनके भाई और एक जानकार की मदद से वह संकट से बाहर निकलीं।
5,000 रुपये से शुरू हुआ सफर
रेवती कामथ की फूलों की डिजाइनिंग की रुचि घर से ही शुरू हुई थी। उनके पति रघुराम कामथ से प्रेरणा लेकर उन्होंने इस कला को गंभीरता से अपनाया। एक दोस्त से 5,000 रुपये उधार लेकर उन्होंने कॉर्पोरेट फर्म से संपर्क किया और अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें फ्लोरल आर्टिस्ट के रूप में पहला बड़ा ऑर्डर 45,000 रुपये में मिला।
फिर उन्होंने जयनगर में सिर्फ 500 रुपये में एक छोटी जगह किराए पर लेकर व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में बिक्री धीमी थी, लेकिन गुणवत्ता और लगन ने उन्हें पहचान दिलाई। धीरे-धीरे उनका काम बड़ी कंपनियों और मल्टीनेशनल कंपनियों तक पहुंचा। शादियों, रिसेप्शन और बड़े आयोजनों के लिए उनकी सेवाओं की मांग बढ़ी।
आज बेटा खेल रहा है करोड़ों में
रेवती कामथ के बेटे निखिल कामथ जेरोधा के को-फाउंडर हैं। उन्होंने अपने भाई नितिन कामथ के साथ 2010 में जेरोधा की शुरुआत की। फोर्ब्स की नई 40 अंडर 40 सेल्फ-मेड बिलियनेयर्स लिस्ट में निखिल का नाम शामिल है। उनकी नेटवर्थ करीब 3.3 अरब डॉलर आंकी गई है, जबकि जेरोधा की वैल्यूएशन लगभग 8 अरब डॉलर बताई गई है।
रेवती कामथ का यह सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से कोई भी व्यक्ति सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। उन्होंने अपने अनुभव से सभी को यही संदेश दिया कि संघर्ष के बाद अच्छे दिन जरूर आते हैं।