Tuesday, February 3

भारत से ट्रेड डील को अमेरिका ने बताया रणनीतिक हथियार, चीन पर लगाम और रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने की उम्मीद

भारत और अमेरिका के बीच हुई नई व्यापार डील को अब सिर्फ आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का अहम मोड़ माना जा रहा है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के रिपब्लिकन चेयरमैन और वरिष्ठ सांसद जिम रिश ने इस डील को चीन और रूस जैसे अमेरिकी विरोधियों को घेरने का प्रभावी माध्यम बताया है। उन्होंने कहा है कि भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी से न सिर्फ चीन को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में काबू किया जा सकेगा, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

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सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की गई थी, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।

ट्रंप की तारीफ, भारत को बताया अहम साझेदार

जिम रिश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देना राष्ट्रपति ट्रंप की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा लोकतंत्र—भारत—अमेरिका के साथ व्यापारिक बाधाएं कम करने पर सहमत हुआ है, जो दोनों देशों के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक कदम है। रिश ने भारत को अमेरिका का करीबी साझेदार बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग अमेरिका में रहते हैं, जो इस रिश्ते को और मजबूती देते हैं।

चीन और रूस के खिलाफ रणनीति

सीनियर अमेरिकी सांसद ने कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत को संतुलित करने में अमेरिका का बेहद अहम सहयोगी है। नए समझौते के तहत भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने का वादा किया गया है, जिससे अमेरिका को रूसी आक्रामकता का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की ओर से रूसी ऊर्जा क्षेत्र को समर्थन कम होने से यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग पर दबाव बढ़ेगा और युद्ध समाप्ति की संभावनाएं बनेंगी।

रूस से तेल को लेकर मतभेद बरकरार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान और उनके अनुरोध पर अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने की बात कही है, जिसके चलते अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ हटा लिया गया। हालांकि भारत ने सार्वजनिक रूप से कभी यह स्वीकार नहीं किया है कि उसने अमेरिकी दबाव में रूस से तेल खरीद रोकने पर सहमति दी है।

भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी लगाई थी, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसे भारतीय निर्यात और उद्योग जगत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

वैश्विक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चीन, रूस और यूरोप से जुड़े वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। भारत इस समझौते के जरिए न केवल आर्थिक लाभ हासिल कर रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीति में अपनी रणनीतिक भूमिका भी और मजबूत कर रहा है।

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