
रूस ने भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से जुड़े क्षेत्रीय विवादों पर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। मॉस्को ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि वह भारत-पाकिस्तान या अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह की मध्यस्थता की भूमिका नहीं निभा रहा है। रूस ने जोर देकर कहा कि दिल्ली और इस्लामाबाद को अपने आपसी मतभेद शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाने चाहिए।
रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यदि संबंधित पक्ष औपचारिक रूप से अनुरोध करते हैं तो रूस किसी समाधान में मदद के लिए तैयार रहेगा, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई प्रक्रिया या पहल नहीं चल रही है।
लावरोव से सवाल, मंत्रालय ने दिया साफ जवाब
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव में रूस की भूमिका को लेकर सवाल पूछे गए थे। इसके जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा,
“रूस इन देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाता। यदि किसी पक्ष की ओर से अनुरोध किया जाता है, तो हम मतभेद सुलझाने में हरसंभव सहयोग के लिए हमेशा तैयार हैं।”
रूस का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान भारत के साथ तनाव के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश करता रहा है।
पाकिस्तान को कूटनीतिक झटका
हाल के महीनों में पाकिस्तान ने रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है। इस दौरान पाकिस्तान की यह भी कोशिश रही कि रूस को भारत के साथ विवादों में मध्यस्थ के रूप में आगे लाया जाए। हालांकि रूस ने एक बार फिर भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख का समर्थन करते हुए साफ कर दिया है कि वह इस तरह की किसी भूमिका में नहीं आएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान शहबाज शरीफ सरकार के लिए कूटनीतिक झटका है, क्योंकि पाकिस्तान को इस मुद्दे पर मॉस्को से उम्मीदें थीं।
रूस-पाकिस्तान संबंधों पर भी बयान
रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में रूस और पाकिस्तान के बीच कई अहम द्विपक्षीय बैठकें हुई हैं, जिनमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात शामिल है। यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की इच्छा को दर्शाता है। रूस और पाकिस्तान 2030 तक व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
रूस ने पाकिस्तान में निवेश में रुचि दिखाई है, खासतौर पर स्टील मिल्स और रेलवे ढांचे के आधुनिकीकरण को लेकर।
भारत-रूस की पुरानी साझेदारी
रूस और भारत दशकों से भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहे हैं। शीत युद्ध के दौर से लेकर मौजूदा वैश्विक हालात तक दोनों देशों के संबंध मजबूत बने रहे हैं। वहीं पाकिस्तान को परंपरागत रूप से अमेरिकी खेमे का हिस्सा माना जाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान का रूस के करीब आने का प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालांकि रूस ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भारत-पाक विवाद में उसका रुख स्पष्ट है और वह किसी भी तरह की मध्यस्थता से दूरी बनाए रखेगा।