Tuesday, February 3

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ घटाने को क्यों मजबूर हुआ अमेरिका, विशेषज्ञों ने बताया भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

भारत और अमेरिका के बीच घोषित नई ट्रेड डील को वैश्विक स्तर पर भारत की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अमेरिका के लिए रणनीतिक मजबूरी और भारत के लिए सही समय पर बनाए गए प्रभावी दबाव का नतीजा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद इस समझौते पर सहमति बनी। दुनिया भर में इस डील पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और अधिकांश विश्लेषक इसे भारत की स्पष्ट जीत बता रहे हैं।

विशेषज्ञों की नजर में भारत की सफलता

अमेरिकी लेखक और वरिष्ठ पत्रकार सदानंद धुमे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि जिनकी तारीफ बनती है, उनकी तारीफ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दंडात्मक अमेरिकी टैरिफ को हटाने के लिए सफल बातचीत करना और वियतनाम व बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ दर हासिल करना मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि है। धुमे ने इसे भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कार्यकाल की शानदार शुरुआत भी बताया।

अमेरिका पर कैसे बना दबाव

रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने अमेरिका पर निर्णायक दबाव बनाया। इस समझौते से भारत को वैश्विक बाजार में बढ़त मिली और अमेरिका को पीछे छूट जाने का खतरा महसूस हुआ। इसके अलावा ईरान से लेकर यूरोप तक अमेरिका के बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने भी वॉशिंगटन को जोखिम कम करने और भारत के साथ समझौता करने के लिए प्रेरित किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन परिस्थितियों में अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया, ताकि एशिया में अपनी आर्थिक और रणनीतिक पकड़ बनाए रखी जा सके।

रूसी तेल को लेकर मतभेद

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि भारत ने रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाने का भरोसा दिया है। हालांकि अमेरिकी विश्लेषक माइकल कुगलमैन ने इस दावे पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि यह सच है कि भारत ने नवंबर के बाद से रूसी तेल का आयात कम किया है, लेकिन पूर्ण रूप से खरीद बंद करने पर सहमति की पुष्टि नहीं होती। फिर भी, आयात में आई इस कमी और राजदूत सर्जियो गोर के प्रयासों ने डील को अंतिम रूप देने में भूमिका निभाई हो सकती है।

ट्रंप का बयान

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मित्रता और उनके अनुरोध के चलते अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते पर तत्काल सहमति बनी है। इसके तहत टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे।

वैश्विक संकेत

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता न केवल भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन और भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर दिखेगा।

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