
पाकिस्तान में गहराती राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ता उग्रवाद और खराब होती सुरक्षा व्यवस्था अब चीन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के भविष्य पर भारी पड़ती नजर आ रही है। इटली के प्रतिष्ठित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल पॉलिटिकल स्टडीज (ISPI) की ताजा रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो पाकिस्तान में चीन का 62 अरब डॉलर से अधिक का निवेश गंभीर संकट में पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हालात इतने अस्थिर हो चुके हैं कि चीनी अधिकारियों और इंजीनियरों की सुरक्षित आवाजाही तक सवालों के घेरे में है। यदि बीजिंग को अपने नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा का भरोसा नहीं मिला, तो चीन को इस्लामाबाद के साथ अपने रणनीतिक जुड़ाव पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
चीन की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को झटका
आईएसपीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में स्थिरता के जरिए पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी सीमाओं पर एक सुरक्षित, आर्थिक रूप से मजबूत क्षेत्र तैयार करने की चीन की महत्वाकांक्षा हालिया घटनाक्रमों के चलते कमजोर पड़ती दिख रही है।
सीपेक को बीजिंग की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की रीढ़ माना जाता है, लेकिन पाकिस्तान में बढ़ते संकट ने इस परियोजना की रफ्तार थाम दी है।
पाकिस्तान–तालिबान तनाव ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में अक्टूबर 2025 की उस घटना का भी जिक्र है, जब पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सीमा पर तनाव चरम पर पहुंच गया था और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई थीं। सितंबर 2021 में काबुल में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से दोनों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए हैं।
इस टकराव ने न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति को और कमजोर किया, बल्कि चीन की रणनीतिक गणनाओं को भी उलझा दिया है।
62 अरब डॉलर का दांव खतरे में
रिपोर्ट में साफ कहा गया है,
“करीब एक दशक पहले पाकिस्तान पर 62 अरब डॉलर का दांव लगाने के बाद अब बीजिंग क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर बेहद चिंतित है। घरेलू उग्रवाद और शत्रुतापूर्ण पड़ोस के बीच पाकिस्तान की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।”
सीपेक के तहत चीन ने पाकिस्तान में सड़कों, बिजली परियोजनाओं, औद्योगिक क्षेत्रों और बंदरगाहों में भारी निवेश किया है। इसका सबसे अहम लक्ष्य बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के जरिए अरब सागर तक सीधी पहुंच बनाना है।
आंतरिक अशांति बनी सबसे बड़ी बाधा
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में जारी आंतरिक हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण चीन को अपने निवेश से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई सीपेक परियोजनाएं या तो धीमी हो गई हैं या पूरी तरह ठप पड़ी हैं, जिससे बीजिंग की चिंता और बढ़ गई है।
बीएलए और टीटीपी के हमलों से हालात बदतर
बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लगातार हमलों ने सीपेक की प्रमुख परियोजनाओं, विशेषकर ग्वादर बंदरगाह के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सुरक्षा हालात इतने खराब हो गए कि 2024 के अंत में सीपेक से वित्तपोषित ग्वादर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन ऑनलाइन करना पड़ा।
इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) भी खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चीनी परियोजनाओं को लगातार निशाना बना रही है, जिससे हालात और अधिक विस्फोटक हो गए हैं।
निष्कर्ष
आईएसपीआई की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यदि पाकिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता बहाल नहीं हुई, तो CPEC चीन के लिए अवसर से ज्यादा बोझ बन सकता है। बीजिंग के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वह अस्थिर पाकिस्तान में अरबों डॉलर का दांव जारी रखे, या अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करे।