
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी के संभावित विलय को लेकर बयानबाजी जारी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विलय की किसी तैयारी से इंकार किया है, लेकिन अजित पवार के बेहद करीबी नेता किरन गुजर ने फिर से बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि एनसीपी के दोनों खेमें अंततः एक साथ आएंगे और यह दादा की आखिरी इच्छा थी।
किरन गुजर वही नेता हैं, जिन्हें अजित पवार ने हादसे से पहले आखिरी कॉल की थी। उन्होंने बताया कि अजित पवार ने उन्हें जिला पंचायत चुनाव से जुड़ी कुछ तैयारियां करने के निर्देश दिए थे, लेकिन 28 जनवरी की सुबह उनका निजी चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। किरन गुजर ने कहा, “एनसीपी के दोनों गुटों का विलय होना चाहिए। यह दादा की अंतिम इच्छा थी और वह चाहते थे कि दोनों गुट साथ आएं। अभी पवार परिवार के सदस्य 10-11 दिन तक इस विषय पर टिप्पणी नहीं कर सकते, उसके बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।”
वहीं, अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने साफ किया है कि उनका गुट एनडीए के साथ है। भाजपा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर एनसीपी का विलय होता है, तो उससे पहले पार्टी को अपनी सहमति देना जरूरी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को यह शर्त लगाते हुए कहा कि एनसीपी के दोनों गुटों को भाजपा से चर्चा किए बिना कोई बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि शरद पवार गुट एनसीपी के विलय की दिशा में इच्छुक है। अगर दोनों गुट साथ आते हैं, तो महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक पार्टी की ताकत बढ़ जाएगी। केंद्रीय स्तर पर एनसीपी के कुल सांसदों की संख्या 11 तक पहुंच सकती है।