Monday, February 2

गाजियाबाद: इंसानियत की मिसाल बने सुरिंदर, एक रुपये में दे रहे जरूरतमंद बच्चों को पूरी यूनिफॉर्म स्टार्टअप की कमाई का 5 प्रतिशत गरीबों पर खर्च, कपड़ा बैंक से जुड़ रहे सैकड़ों चेहरे

गाजियाबाद। समाज में जब महंगाई और असमानता की चर्चा आम है, तब गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित रईसपुर गांव के किसान चौधरी सुरिंदर ने मानवता की एक मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर एक अनोखा कपड़ा बैंक शुरू किया है, जहां जरूरतमंद बच्चे महज एक रुपये में पूरी स्कूल यूनिफॉर्म प्राप्त कर सकते हैं।

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सुरिंदर का कहना है कि सेवा को भीख का रूप न दिया जाए, इसी सोच के तहत प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये की राशि तय की गई है। इससे जरूरतमंद बच्चे पूरे आत्मसम्मान, गरिमा और आत्मविश्वास के साथ कपड़े ले सकें।

सम्मान के साथ मदद, साल में चार बार ही सुविधा

कपड़ा बैंक से कोई भी जरूरतमंद बच्चा साल में अधिकतम चार बार ही कपड़े ले सकता है, ताकि संसाधनों का सही और न्यायपूर्ण वितरण हो सके। इसका उद्देश्य केवल कपड़े देना नहीं, बल्कि समाज में बराबरी और सम्मान की भावना को मजबूत करना है।

संघर्षों से सीखा सेवा का पाठ

चौधरी सुरिंदर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। कठिन आर्थिक हालात के बावजूद उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। उनके माता-पिता ने पशुपालन कर दूध और घी बेचकर उनकी पढ़ाई की फीस जुटाई। यही संघर्ष आज समाज के कमजोर वर्ग के लिए कुछ करने की उनकी प्रेरणा बना।

1000 बच्चों की यूनिफॉर्म उपलब्ध

मित्रों दीपक, सतेंद्र, रोहित, प्रिंस, सूरज, सुमित, मोनू, अर्जुन और संदीप के सहयोग से संचालित इस कपड़ा बैंक में फिलहाल करीब 1000 बच्चों की पूरी ड्रेस उपलब्ध है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक वस्तुएं न ले।

स्टार्टअप की कमाई से चल रहा कपड़ा बैंक

सुरिंदर ने बताया कि उनका यह सामाजिक कार्य उनके स्टार्टअप आत्मनिर्भर भारत मार्ट (FPO)’ से अर्जित आय से संचालित होता है। दूध-घी, मसाले, आटा, मिलेट्स आटा, बेसन, सरसों का तेल और शहद जैसे उत्पादों से होने वाली कमाई का 5 प्रतिशत हिस्सा सीधे कपड़ा बैंक पर खर्च किया जाता है।

अब तक करीब 60 जरूरतमंद बच्चे इस कपड़ा बैंक से लाभ उठा चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

समाज के लिए प्रेरणा बना कपड़ा बैंक

स्थानीय लोगों का कहना है कि चौधरी सुरिंदर और उनके साथियों की यह पहल न सिर्फ जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि थोड़े से संकल्प और ईमानदार नीयत से बड़ा बदलाव संभव है

 

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