
जबलपुर: जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल किसी महिला की फोटो खींचना, उसे बदनाम करने या उसकी निजता भंग करने के इरादे के बिना, धारा 509 के तहत अपराध नहीं बनता।
यह मामला अधिवक्ता सुभाष तिवारी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि तिवारी ने मार्केट में जूस पीते समय उनकी फोटो खींची और उन्हें बदनाम करने की धमकी दी। एफआईआर घटना के पांच महीने बाद दर्ज कराई गई थी, जबकि यह घटना 31 मई 2024 की बताई गई थी।
अधिवक्ता की याचिका में कहा गया कि यह एफआईआर उनके विरोधी पक्ष की पैरवी के चलते द्वेषपूर्ण तरीके से दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि धारा 509 के तहत केवल शब्द बोलना, आवाज निकालना, इशारा करना या कोई वस्तु दिखाना ही अपराध बनता है, जिससे महिला की मर्यादा और निजता पर असर पड़े।
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष इस मामले में धारा 509 के आवश्यक तत्वों को साबित नहीं कर पाया। शिकायतकर्ता द्वारा धारा 164 के तहत दिए गए बयान से भी यह स्पष्ट नहीं हुआ कि फोटो खींचने का काम याचिकाकर्ता का ही था।
इसलिए हाईकोर्ट ने अधिवक्ता सुभाष तिवारी के खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त कर दिया। याचिका की पैरवी अधिवक्ता निखिल भट्ट ने की।