Saturday, January 31

सऊदी के ‘ग्रीन सिग्नल’ के बाद ईरान पर हमले की उलटी गिनती शुरू US इजरायल की निर्णायक सैन्य कार्रवाई की तैयारी, कूटनीति हाशिये पर

तेहरान/वॉशिंगटन।
मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे होते जा रहे हैं। सऊदी अरब के समर्थन के संकेतों के बाद ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका लगभग निश्चित मानी जा रही है। पश्चिमी देशों के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल अब कूटनीति की सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और सैन्य विकल्प पर अंतिम मंथन चल रहा है। चर्चा अब इस बात पर नहीं है कि हमला होगा या नहीं, बल्कि इस पर है कि कब होगा।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट और गल्फ ऑफ ओमान क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर ली है। सऊदी अरब का रुख भी इस दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने वॉशिंगटन में हुई एक निजी बैठक में कथित तौर पर ट्रंप प्रशासन से कहा है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो ईरान और अधिक शक्तिशाली हो सकता है।

हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक तौर पर ईरान से बातचीत की बात कह चुके हैं, लेकिन पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ का बयान स्थिति की गंभीरता को उजागर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना राष्ट्रपति के किसी भी आदेश को तुरंत लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस बीच ईरान के तेवर भी बदले नजर आ रहे हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुर्की यात्रा के दौरान कहा कि ईरान बराबरी और निष्पक्षता के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकियों के साये में वार्ता संभव नहीं। इसके बावजूद पश्चिमी सूत्रों का दावा है कि अब नई डील या समझौते की चर्चा लगभग बंद हो चुकी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभावित हमले का उद्देश्य ईरान के शासन ढांचे को निर्णायक रूप से कमजोर करना होगा। इसे अब तक का सबसे बड़ा और ‘अभूतपूर्व’ सैन्य ऑपरेशन बताया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात एक “एक बार मिलने वाले मौके” जैसे हैं, जिसका लाभ उठाया जाना चाहिए।

इजरायल भी पूरी तरह अलर्ट मोड में है। उसके एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका करेगा, लेकिन यदि ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल हमला हुआ, तो जवाब “विनाशक” होगा।

पिछले वर्ष जून में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख अंडरग्राउंड परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान—पर हमले किए गए थे। उस समय दावा किया गया था कि ईरान का परमाणु ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है। इसके बावजूद अब नए हमले की तैयारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—अगर परमाणु ढांचा नष्ट हो चुका है, तो इस बार हमले का असली मकसद क्या है?

फिलहाल एक बात साफ है—मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा है और दुनिया की नजरें अब केवल इस सवाल पर टिकी हैं कि अगला कदम कब उठाया जाएगा।

 

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