Saturday, January 31

कंगाल पाकिस्तान बन रहा ‘गुलाम’, शहबाज शरीफ ने खोई इज्जत की बात कही – 5 कारण समझिए

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरी संकट में है और देश अब वित्तीय गुलामी की तरफ बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद कबूल किया है कि जब वे कर्ज लेने विदेश जाते हैं, तो उनके सामने कई अनचाही शर्तें रखी जाती हैं, जिन्हें पूरा करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “कर्ज लेने वाले का सिर शर्म से झुका होता है।”

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पाकिस्तान भले ही हाल ही में डिफॉल्ट से बच गया हो, लेकिन आर्थिक आज़ादी अब दूर की कहानी लग रही है। केवल चीन का समर्थन ही देश की दम तोड़ती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकता। IMF और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सख्त शर्तें, साथ ही बढ़ती चरमपंथी हिंसा, पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।

शहबाज शरीफ के कबूलनामे और आर्थिक संकट को 5 बिंदुओं में समझें:

  1. कर्ज पर चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कर्ज पर निर्भर है। सार्वजनिक कर्ज देश की GDP का 70–80% तक पहुँच गया है। कर्ज को बार-बार रीफाइनेंस करना पड़ता है, जिससे देश की आर्थिक स्वायत्तता कमजोर हो रही है। शहबाज शरीफ के अनुसार, कर्ज लेने के लिए पाकिस्तान को कई बार समझौते करने पड़े।
  2. गिरती अर्थव्यवस्था
    पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर बेहद कम है। विश्व बैंक ने जून 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष में 3% की वृद्धि दर्ज की है। IMF ने भी 2026 में 3.2% की ही वृद्धि का अनुमान जताया है। इस मंदी ने विकास की उम्मीदों को काफी कमजोर कर दिया है।
  3. निर्यात संकट
    पाकिस्तान का निर्यात लगातार घट रहा है। 2024 में GDP में निर्यात का हिस्सा सिर्फ 10.4% रहा, जबकि 1990 के दशक में यह 16% था। पड़ोसी देशों के साथ व्यापार घाटा 44% तक पहुँच गया है। बांग्लादेश, अफगानिस्तान और श्रीलंका के साथ व्यापार निगेटिव ग्रोथ में है।
  4. बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पलायन
    पाकिस्तान छोड़ने वाली कंपनियों की लंबी सूची है—प्रॉक्टर एंड गैंबल, माइक्रोसॉफ्ट, उबर, यामाहा, शेल, एली लिली और टेलीनॉर जैसी बड़ी कंपनियां देश छोड़ चुकी हैं। फार्मास्यूटिकल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। 48 बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में से आज आधी भी देश में नहीं हैं।
  5. चरमपंथी हिंसा का बढ़ता बोझ
    2025 में आतंकवादी हमलों में 34% की वृद्धि हुई। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज़ के अनुसार 699 हमले हुए, जिनमें 1034 लोग मारे गए और 1366 घायल हुए। मरने वालों में 42% से ज्यादा सुरक्षा कर्मी थे। इस हिंसा ने निवेशकों को डरा दिया है और देश को असुरक्षित बना दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान को खतरनाक देश की श्रेणी में रखा है।

नतीजा:
कर्ज पर निर्भरता, कमजोर अर्थव्यवस्था, निर्यात संकट, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पलायन और बढ़ती हिंसा—इन सब कारणों से पाकिस्तान धीरे-धीरे आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बातें इसे और स्पष्ट करती हैं कि देश की इज्जत और स्वतंत्रता पर संकट गहरा गया है।

 

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