
नई दिल्ली: अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर नजर रखने वाला एक ऐसा ऐप, जो उनकी हर रोज़ की मौजूदगी को ट्रैक कर सके और किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार या मित्रों को अलर्ट कर सके, भारत में अब ज़रूरी नजर आने लगा है।
हालिया घटनाएं इस आवश्यकता को उजागर करती हैं। गाजियाबाद में 69 वर्षीय दीपक कुमार अकेले रहते थे। उनका शव 12 दिन बाद मिला, संभवतः दिल का दौरा पड़ने से। पड़ोसी और परिवार उनके संपर्क में थे, लेकिन किसी ने समय पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे मामले अकेले रहने वाले बुजुर्गों और शहरों में नए बसे लोगों के लिए चिंताजनक हैं।
चीन में इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए “Are You Dead” नामक ऐप बनाया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले रोजाना एक बटन दबाकर अपनी मौजूदगी दर्ज करते हैं। अगर लगातार दो दिन तक चेक-इन नहीं होता, तो ऐप उनके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को अलर्ट भेज देता है। ऐप की कीमत लगभग 100 रुपये है और इसे एक बार भुगतान कर इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत में अकेलेपन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2013 और 2018 में बेंगलुरु में दो अलग-अलग महिलाओं के अकेलेपन और मृत्युदर के मामले सामने आए। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक बुजुर्ग महिला अपने घर में मृत पाई गई। अकेलेपन के कारण परिवार में रहने वाले भी प्रभावित हो सकते हैं।
देश में बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए कुछ अनौपचारिक और आधिकारिक उपाय मौजूद हैं। कई शहरों में पुलिस वरिष्ठ नागरिकों के नियमित चेक-इन करती है। उत्तर प्रदेश में 112 इमरजेंसी नंबर और चेक-इन योजना लागू है। मुंबई, नागपुर और कोलकाता जैसी जगहों पर भी पुलिस और समुदाय मिलकर बुजुर्गों की मदद करते हैं। व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर “गुड मॉर्निंग” संदेश भी एक अनौपचारिक सेफ्टी सिस्टम के रूप में काम करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा और निगरानी के लिए तकनीकी उपायों को अपनाना अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुका है। ऐसे ऐप्स और योजनाएं जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।