Saturday, January 31

अमेरिका-ईरान तनाव: भारत पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मूज’ पर अपना पूरा नियंत्रण होने का दावा किया है, वहीं अमेरिका ने किसी भी उकसावे पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बढ़ते टकराव से न सिर्फ मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक हित और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। ईरान दुनिया के तेल उत्पादन का 4-5% हिस्सा देता है और भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से आयात करता है। किसी भी संघर्ष के कारण तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे देश में महंगाई बढ़ सकती है।

आर्थिक प्रभाव: भारत का ईरान के साथ सीधा व्यापार सीमित है (कुल निर्यात का केवल 0.3%), लेकिन अमेरिका उन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं। इससे भारत के बासमती चावल, फल और मेवों के निर्यात पर असर पड़ सकता है। सप्लाई चेन में रुकावटें आने से सामान की डिलीवरी और भुगतान में कठिनाई हो सकती है।

चाबहार बंदरगाह और रणनीतिक चुनौती: भारत के लिए ईरान के चाबहार बंदरगाह का महत्व बेहद है। अमेरिका के दबाव या संघर्ष के कारण इस बंदरगाह में निवेश और संचालन प्रभावित हो सकता है। साथ ही, खाड़ी देशों में काम कर रहे 80-90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को संतुलित विदेश नीति अपनानी होगी। उसे अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखनी है और साथ ही ईरान के साथ अपने हितों की सुरक्षा करनी है। अगर भारत ईरान में अपनी भूमिका कम करता है, तो चीन इस खाली जगह को भर सकता है। इसलिए भारत के लिए पश्चिम एशिया में अपने कूटनीतिक और आर्थिक हितों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

 

 

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