
मेडिकल एजुकेशन के लिए चीन भारतीय छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसका मुख्य कारण यह है कि चीन में भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में MBBS की डिग्री कम खर्च में और वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मिलती है। चीनी मेडिकल यूनिवर्सिटी की डिग्रियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं और यहां का मेडिकल रिसर्च भी दुनिया में शीर्ष स्तर का है।
हाल ही में जारी ‘टाइम्स हायर एजुकेशन’ (THE) 2026 वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में मेडिकल फील्ड में चीन की यूनिवर्सिटीज का दबदबा देखा गया। इस रैंकिंग में कुल 1230 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया और दुनिया की टॉप-50 मेडिकल यूनिवर्सिटी में चीन की 4 यूनिवर्सिटी शामिल हैं।
चीन में MBBS करने के लिए टॉप-10 मेडिकल यूनिवर्सिटी:
- सिंघुआ यूनिवर्सिटी
- पेकिंग यूनिवर्सिटी
- फुडान यूनिवर्सिटी
- शंघाई जियो टोंग यूनिवर्सिटी
- झेजियांग यूनिवर्सिटी
- हुआझोंग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी
- नानजिंग यूनिवर्सिटी
- सिचुआन यूनिवर्सिटी
- सुन यात-सेन यूनिवर्सिटी
- वुहान यूनिवर्सिटी
चीन में MBBS की पढ़ाई छह साल की होती है, जिसमें पहले पांच साल क्लासरूम और बेसिक क्लिनिकल ट्रेनिंग में बिताए जाते हैं। इसके बाद एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप होती है।
हालांकि पेकिंग और सिंघुआ जैसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई महंगी है, लेकिन नानजिंग और सिचुआन यूनिवर्सिटी में किफायती फीस में डिग्री मिल जाती है। चीन में सालाना ट्यूशन फीस लगभग 3.5 लाख से 6 लाख रुपये है। हॉस्टल और रहने-खाने का खर्च 1 से 1.5 लाख रुपये के बीच आता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छात्र केवल NMC मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में ही एडमिशन लें और अंग्रेजी माध्यम के कोर्स में ही प्रवेश करें।
चीन में MBBS की पढ़ाई के इस अवसर ने इसे भारतीय छात्रों के लिए सबसे आकर्षक विकल्प बना दिया है।