
टोंक: राजस्थान के राजनीतिक रूप से चर्चित नेता नरेश मीणा और राज्य सरकार के बीच चल रहे गतिरोध का शुक्रवार देर रात लगभग 1 बजे समाधान हो गया। समर्थकों के साथ जयपुर कूच पर निकले मीणा को नेशनल हाईवे 116 पर आमली मोड़ के पास भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बीच रोक दिया गया। कई घंटे चली तनातनी और मैराथन वार्ता के बाद प्रशासन और नरेश मीणा के बीच लिखित सहमति बन गई। इसके बाद मीणा ने अपना जयपुर कूच स्थगित कर दिया।
संभागीय आयुक्त की मध्यस्थता और वार्ता के मुख्य बिंदु
एडीएम टोंक राम रतन सोकरिया और अतिरिक्त एसपी की उपस्थिति में हुई वार्ता में अजमेर से संभागीय आयुक्त ने नरेश मीणा से फोन पर सीधी बातचीत करवाई। वार्ता के बाद सरकार ने समरावता हिंसा के पीड़ितों को बकाया मुआवजा जल्द देने, वहां स्कूल भवन का प्रस्ताव भेजने और आंदोलन के दौरान दर्ज 60 मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने पर सहमति जताई। साथ ही सोप और नगरफोर्ट थानों में पुलिसकर्मियों पर लगे बर्बरता के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कराने का आश्वासन भी दिया गया।
नरेश मीणा की प्रमुख मांगें
नरेश मीणा ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम क्रमशः 11 और 8 सूत्रीय मांगें रखी थीं। इनमें प्रमुख हैं:
- 14 गांवों को उनियारा तहसील में जोड़ना।
- समर्थन मूल्य और फसल बीमा का समय पर भुगतान।
- ईसरदा और गलवा बांध पीड़ितों का उचित पुनर्वास।
- टोल वसूली में अनियमितताओं पर रोक और सड़क-पानी जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान।
हाईवे पर घंटों चला ड्रामा
कोटड़ी मोड़ पर आयोजित जनसभा के बाद हजारों समर्थक जयपुर की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें हाईवे पर ही घेर लिया। रात भर मौके पर भारी पुलिस जाप्ता तैनात रहा। एडीएम सोकरिया ने बताया कि प्रशासन ने अब तक हुई प्रगति की लिखित रिपोर्ट नरेश मीणा को सौंप दी है, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया।
इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में स्थिरता की उम्मीद जगी है, और प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि संवाद और सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान संभव है।