
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार की ओर से बकाया पानी बिलों के निपटारे के लिए शुरू की गई लेट पेमेंट सरचार्ज (LPSC) स्कीम सरकारी तंत्र की खामियों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सितंबर 2025 में घोषित इस योजना का लाभ चार महीने बाद भी केवल 22.54% उपभोक्ताओं को ही मिल सका है। सिस्टम अपडेट न होने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण सरकार ने मजबूरी में स्कीम की अवधि बढ़ा दी है।
योजना और बकाया का आंकड़ा
जल बोर्ड के कुल 29 लाख उपभोक्ताओं में से करीब 14.68 लाख उपभोक्ताओं का कई सालों से बिल बकाया है। इन पर कुल 16,068 करोड़ रुपये की देनदारी थी, जिसमें मूल राशि 5,057 करोड़ और ब्याज/एरियर 11,011 करोड़ रुपये शामिल हैं। उपभोक्ताओं की मुख्य शिकायत गलत और औसत बिलिंग को लेकर थी। राहत देने के लिए जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने एरियर पर 100% छूट की घोषणा की थी। बोर्ड को उम्मीद थी कि इससे 5,057 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, लेकिन अब तक केवल 430.26 करोड़ रुपये ही जमा हो पाए हैं।
सिस्टम की विफलताएं और चुनौतियां
योजना के फ्लॉप होने के पीछे विभाग की अव्यवस्था मुख्य कारण रही। जब उपभोक्ता जोनल रेवेन्यू ऑफिसर (ZRO) दफ्तर जाते हैं, तो न स्टाफ उपलब्ध होता है और न पर्याप्त मशीनें। सॉफ्टवेयर अपडेट न होने के कारण जमा बिल सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाए और अगले महीने ब्याज के साथ नए बिल भेज दिए गए। इसके अलावा कैश काउंटिंग मशीनों की कमी ने प्रक्रिया को और धीमा कर दिया।
कितने लोग कर पाए बकाया जमा
आंकड़ों के अनुसार 14,68,000 पात्र उपभोक्ताओं में से केवल 3,30,908 लोग ही अपना बकाया जमा कर पाए हैं। बाकी 11,37,092 (77.46%) उपभोक्ता अब भी इस लाभ से वंचित हैं। विभाग का दावा है कि अब सिस्टम की खामियों को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि विस्तारित अवधि में उपभोक्ता आसानी से अपने बकाया बिल जमा कर सकें।