Thursday, May 14

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MP सरकार का खजाना भरने वाला सिंगरौली, लेकिन हालात बेहाल: मौत के बाद भी नहीं मिलता शव वाहन, सड़क न होने से बीमार बुजुर्ग खाट पर अस्पताल ले जाए गए

सिंगरौली (मध्य प्रदेश):
‘ऊर्जाधानी’ कहलाने वाला सिंगरौली जिला एक बार फिर अपनी बदहाली की वजह से सुर्खियों में है। राज्य सरकार को इंदौर के बाद सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला यह इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। हालात यह हैं कि मौत के बाद भी लोगों को सम्मानजनक तरीके से शव वाहन तक नसीब नहीं होता। दो घटनाओं ने जिले के विकास के सरकारी दावों की सच्चाई उजागर कर दी है।

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पोस्टमार्टम के लिए नहीं मिली गाड़ी, कचरा ढोने वाली ट्रॉली में ले जाना पड़ा शव

सरई थाने के इटावा गांव में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। हत्या के एक मामले में मृतक का पोस्टमार्टम होना था, लेकिन नगर परिषद के पास शव वाहन ही उपलब्ध नहीं था। मजबूरी में अधिकारियों ने कचरा ढोने वाली ट्रॉली गाड़ी को ही शव वाहन बना दिया।

इसी ट्रॉली में शव को इटावा गांव से मर्चुरी तक ले जाया गया और पोस्टमार्टम के बाद उसी गाड़ी से शव को वापस घर लाया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन की भारी किरकिरी हो रही है।

नगर परिषद सरई के CMO सुरेंद्र ने स्वीकार किया कि उनके पास शव वाहन नहीं है, इसलिए ‘जुगाड़’ से काम चलाना पड़ता है।

बुजुर्ग महिला को सड़क न होने के कारण खाट पर ले जाना पड़ा अस्पताल

जिले की बदहाली यहीं खत्म नहीं होती। देवसर ब्लॉक के चुरवाही गांव में 80 वर्षीय बीमार महिला को परिजन खाट पर उठाकर अस्पताल ले गए। परिजनों ने बताया कि एंबुलेंस दो घंटे देरी से पहुंची और तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी। घर से मुख्य सड़क तक केवल एक पगडंडी होने के कारण किसी भी वाहन का पहुंचना संभव नहीं था।

महिला के बेटे प्रदीप शाह ने बताया कि उन्हें अपनी मां को करीब एक किलोमीटर तक खाट पर उठाकर ले जाना पड़ा, क्योंकि गांव में सड़क ही मौजूद नहीं है।

सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला जिला, फिर भी विकास से कोसों दूर

सिंगरौली राज्य की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा योगदान देने वाले जिलों में शामिल है, इसके बावजूद गांवों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। विधायक राजेंद्र मेश्राम का दावा है कि क्षेत्र पहले ‘नर्क’ था और अब ‘स्वर्ग’ बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कई सड़कों को स्वीकृति मिल चुकी है।

लेकिन एक के बाद एक सामने आती तस्वीरें इन दावों को कटघरे में खड़ा करती हैं।
राज्य सरकार का खजाना भरने वाले इस जिले में लोगों को सम्मानजनक सुविधा तक नहीं मिल रही है—न शव वाहन, न सड़कें, न समय पर एंबुलेंस।

यह घटनाएं सिंगरौली के विकास की असली स्थिति को बयां करती हैं और प्रशासन पर कई सवाल खड़े करती हैं।

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