Saturday, January 31

झारखंड सूचना आयोग 5 साल से ठप, सरकार बोली—चार हफ्ते में आयोग पूरी तरह कार्यशील होगा

रांची।
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में सूचना का अधिकार (RTI) व्यवस्था के ठप होने पर गहरी नाराजगी जताई है और राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। बीरेंद्र सिंह नामक याचिकाकर्ता की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति ए.के. राय की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि सूचना आयोग लंबे समय से निष्क्रिय रहने के कारण आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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सरकार का आश्वासन—चार हफ्ते में कार्यशील

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि आयोग को शीघ्र सक्रिय करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चार सप्ताह के अंदर झारखंड सूचना आयोग पूरी तरह से कार्यरत हो जाएगा।

सुनवाई में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव भी अदालत में उपस्थित थे। इससे पहले कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि आयोग को जल्द सक्रिय नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

 

पिछले पांच वर्षों से निष्क्रिय

याचिकाकर्ता के वकील विकास कुमार ने अदालत को बताया कि झारखंड सूचना आयोग लगभग पांच वर्षों से निष्क्रिय पड़ा है। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के सभी पद रिक्त हैं। इस कारण सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत द्वितीय अपील का कोई मंच उपलब्ध नहीं है।

बीते पांच वर्षों में आम नागरिकों को जानकारी के लिए मजबूरी में सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिससे अदालत पर अनावश्यक बोझ बढ़ा।

 

बीते प्रयास विफल

याचिकाकर्ता बीरेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कुछ जानकारियां मांगी थीं। नियत 30 दिनों की अवधि में जानकारी न मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की। आम तौर पर ऐसी स्थिति में द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष की जाती है। लेकिन आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया ठप रही।

इस संकट को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार हफ्ते का अंतिम समय दिया है, ताकि आयोग पुनः पूरी तरह कार्यशील हो सके और आम नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराई जा सके।

 

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