Monday, May 18

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भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते से पाकिस्तान में आर्थिक संकट की आशंका पूर्व वाणिज्य मंत्री गौहर एजाज ने चेताया—एक करोड़ से अधिक नौकरियां खतरे में

 

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भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। इस समझौते को लेकर पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री और प्रमुख उद्योगपति गौहर एजाज ने चेतावनी दी है कि इससे पाकिस्तान में एक करोड़ से अधिक लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है।

 

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौहर एजाज ने कहा है कि भारत–ईयू FTA के लागू होने से पाकिस्तान का औद्योगिक क्षेत्र, विशेष रूप से 9 अरब डॉलर के टेक्सटाइल उद्योग, को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए एक “गंभीर आर्थिक चुनौती” बताया है।

 

टेक्सटाइल उद्योग पर सबसे बड़ा खतरा

 

एजाज ने कहा कि यूरोपीय बाजार में भारत को मिलने वाली तरजीह से पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक यूरोपीय यूनियन की ओर से पाकिस्तान को मिलने वाले विशेष व्यापारिक लाभ और जीरो-टैरिफ की सुविधा समाप्त होने की कगार पर है। इससे पाकिस्तान के निर्यात, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, पर सीधा असर पड़ेगा।

 

उनका कहना है कि भारत–ईयू समझौते के बाद पाकिस्तान के उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार में टिके रहना बेहद मुश्किल हो जाएगा, जिसका नतीजा बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के रूप में सामने आ सकता है।

 

सरकार से त्वरित कदम उठाने की मांग

 

गौहर एजाज ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार से घरेलू उद्योग को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली और गैस की आपूर्ति, करों में राहत और कुल कारोबारी लागत को पड़ोसी देशों के बराबर लाने की जरूरत पर जोर दिया। एजाज ने साफ कहा कि मौजूदा नीतिगत ढांचे में पाकिस्तानी उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएगा।

 

भारत–ईयू की ‘महा डील’

 

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता 27 जनवरी को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हुआ। लगभग 20 वर्षों की बातचीत और कई दौर की चर्चाओं के बाद यह ऐतिहासिक समझौता फाइनल हुआ है। इस समझौते से करीब 200 करोड़ लोगों की आबादी के लिए एक बड़ा साझा बाजार तैयार होगा।

 

वैश्विक स्तर पर असर

 

भारत–ईयू FTA के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां भारत और यूरोप में इसे आर्थिक अवसरों का बड़ा सौदा माना जा रहा है, वहीं अमेरिका, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों में इसको लेकर चिंता जताई जा रही है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक व्यापार संतुलन को नई दिशा देगा, लेकिन इसके साथ ही पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों के सामने नई आर्थिक चुनौतियां भी खड़ी करेगा।

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