
गाजियाबाद नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स को डीएम सर्किल दरों के अनुरूप कई गुना बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर शहर में सियासी और प्रशासनिक खींचतान तेज हो गई है। इस मुद्दे पर मेयर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर मेयर बढ़े हुए हाउस टैक्स पर चर्चा के लिए निगम की बोर्ड बैठक बुलाने पर जोर दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के अधिकारी इसे कानूनी रूप से उचित नहीं मान रहे हैं।
हाउस टैक्स बढ़ोतरी का मामला इस समय इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन है और इसकी सुनवाई अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 3 फरवरी को कोर्ट से फैसला आने की संभावना है। ऐसे में अदालत के निर्णय से पहले ही नगर निगम की आंतरिक राजनीति गरमा गई है।
मेयर सुनीता दयाल ने हाई कोर्ट में सुनवाई से ठीक एक दिन पहले सदन की बोर्ड बैठक बुलाने के लिए निगम अधिकारियों को पत्र लिखा है। इससे पहले भी वह सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि सदन की अनुमति के बिना हाउस टैक्स में बढ़ोतरी पूरी तरह गलत है। उनका कहना है कि हाउस टैक्स की दरें तय करने का अधिकार निर्वाचित सदन का है और अंतिम फैसला पार्षदों द्वारा किया जाना चाहिए।
मेयर सुनीता दयाल ने बताया,
“हमने 2 फरवरी को सदन की बोर्ड बैठक कराने के लिए निगम अधिकारियों को पत्र लिखा था। सांसद के मौजूद न रहने की बात कही जा रही है, जबकि सांसद की ओर से बैठक पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई है। इसका लिखित पत्र भी हमें मिला है, जिसे निगम अधिकारियों को सौंप दिया गया है। अब बैठक बुलाना उनकी जिम्मेदारी है।”
वहीं, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि संसद सत्र के दौरान बोर्ड बैठक बुलाना नियमों के विपरीत है, क्योंकि स्थानीय सांसद नगर निगम के पदेन सदस्य होते हैं। निगम की ओर से जारी पत्र में पूर्व के एक मामले का हवाला भी दिया गया है, जिसमें विधानसभा सत्र के दौरान बैठक बुलाने पर आपत्ति जताई गई थी और तत्कालीन नगर आयुक्त को माफी मांगनी पड़ी थी।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा,
“हम लोग बोर्ड बैठक बुलाने को लेकर तैयारी कर रहे हैं और जल्द से जल्द इसे आयोजित करने की कोशिश है। जहां तक हाउस टैक्स के बड़े बकायेदारों को नोटिस भेजने का सवाल है, यह एक नियमित प्रक्रिया है।”
कोर्ट के फैसले से पहले राजनीतिक संदेश की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि कोर्ट का फैसला चाहे जो भी आए, मेयर शहरवासियों को यह संदेश देना चाहती हैं कि नगर निगम का सदन और पार्षद हाउस टैक्स की बेतहाशा बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं हैं और यह फैसला अधिकारियों की मनमानी का नतीजा है।
कमर्शियल बकायेदारों पर शिकंजा
कानूनी और राजनीतिक खींचतान के बीच नगर निगम ने बड़े कमर्शियल हाउस टैक्स बकायेदारों को नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष सामान्य दरों पर भी नगर निगम ने करीब 300 करोड़ रुपये की वसूली की थी, जबकि इस वर्ष बढ़ी हुई दरों के बावजूद अब तक 200 करोड़ रुपये भी जमा नहीं हो सके हैं। इससे निगम की वित्तीय स्थिति और हाउस टैक्स नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।