Friday, January 30

सक्सेस स्टोरी: यूपीएससी रैंक 15 के बावजूद IAS नहीं, IFS चुनकर PM मोदी के साथ दिखे अधिकारी

 

This slideshow requires JavaScript.

 

UPSC परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करना हर किसी का सपना होता है। आमतौर पर 15वीं रैंक पाने वाले उम्मीदवार IAS बनना पसंद करते हैं, लेकिन सिद्धार्थ बाबू ने इस ट्रेंड को तोड़ दिया।

 

सिद्धार्थ केरल के रहने वाले हैं। 12वीं के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और फिर सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने दूसरे प्रयास में यानी UPSC 2016 में ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल की। उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट था इंटरनेशनल रिलेशन।

 

IFS का चुनाव और करियर

सिद्धार्थ की रुचि अंतरराष्ट्रीय मामलों में थी, इसलिए उन्होंने IAS छोड़कर भारतीय विदेश सेवा (IFS) को चुना। वह 2017 बैच के IFS अधिकारी हैं। कई भाषाओं का ज्ञान होने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री और विदेशी नेताओं के बीच ट्रांसलेटर और प्रतिनिधि के तौर पर काम करने का अनुभव भी है।

 

तैयारी की स्ट्रैटेजी

सिद्धार्थ बताते हैं कि उन्होंने कभी अत्यधिक पढ़ाई की प्रतिस्पर्धा नहीं देखी। उनकी तैयारी में फोकस था—रुचि वाले विषयों को लगातार और व्यवस्थित रूप से पढ़ना। उन्होंने ऐसा टाइम-टेबल बनाया, जिसे लंबे समय तक फॉलो किया जा सके।

 

PM मोदी के साथ गणतंत्र दिवस 2026 में चर्चा

सिद्धार्थ बाबू का नाम तब चर्चा में आया जब 2026 गणतंत्र दिवस समारोह में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नजर आए। उनका पीएम के साथ दिखना उनके योगदान और उपलब्धियों की पहचान का प्रतीक माना जा रहा है।

 

Leave a Reply