
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा ने विधायी कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने और नीति निर्माण को अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से 100 से अधिक फेलो और सहायक फेलो की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल के तहत प्रत्येक विधायक को एक फेलो उपलब्ध कराया जाएगा, जो उनके लिए शोध, रिपोर्ट तैयार करने और नीतिगत सुझाव देने का काम करेगा।
सचिवालय के लिए भी होंगे फेलो
विधानसभा सूत्रों के अनुसार, इसके अलावा करीब 35 फेलो विधानसभा सचिवालय के लिए भी नियुक्त किए जाएंगे। ये फेलो विधानसभा की विभिन्न समितियों के साथ काम करते हुए व्यापक शोध, रिपोर्टिंग और विधायी दस्तावेज तैयार करने में सहयोग देंगे। इससे न केवल विधायकों को तकनीकी सहायता मिलेगी, बल्कि विधानसभा की समग्र शोध क्षमता भी मजबूत होगी।
पारदर्शी और योग्यता–आधारित चयन
इस बार फेलो नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता–आधारित रखने पर जोर दिया जा रहा है। चयन में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, शोध अनुभव और नीति विश्लेषण क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। योग्य उम्मीदवारों को मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा, ताकि वे अपने कार्यों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें।
पहले की भर्ती रद्द होने का रहा है इतिहास
गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2023 में भी विधानसभा में फेलो भर्ती का प्रयास किया गया था, लेकिन आवश्यक अनुमतियों और नियमों के पालन में खामियों के चलते उस प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। इसके अलावा आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में फेलो नियुक्ति को लेकर विवाद भी सामने आया था। चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने कई फेलो की नियुक्ति निरस्त कर दी थी।
निष्पक्षता का भरोसा
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि इस बार फेलो की नियुक्ति पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात या विवाद की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को नीति निर्माण से जोड़ने के साथ-साथ विधानसभा के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाएगी।